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17 साल पुराना कार्टून बना बड़ी भविष्यवाणी? वेनेजुएला हमले के बाद फिर वायरल हुआ ‘Crimes in Progress’

2007 Political Cartoon Predicts Us Venezuela Action Crimes In Progress Viral

Crimes in Progress Cartoon : 17 साल पहले बनाया गया एक राजनीतिक कार्टून आज अचानक दुनिया की बड़ी खबरों से जुड़ता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह कार्टून साल 2007 में ब्राजील के मशहूर राजनीतिक कार्टूनिस्ट कार्लोस लातुफ ने बनाया था।

उस वक्त इसे अमेरिका की विदेश नीति पर व्यंग्य माना गया था, लेकिन अब अमेरिका की वेनेजुएला में हुई हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद लोग इसे भविष्यवाणी जैसा मानने लगे हैं। कार्टून का नाम था Crimes in Progress, जिसमें अमेरिका के वैश्विक हस्तक्षेपों पर सवाल उठाए गए थे।

वेनेजुएला पर हमले के बाद 17 साल पुराना कार्टून वायरल

इस कार्टून में अंकल सैम को व्हाइट हाउस के अंदर फोन पर बात करते दिखाया गया है। उनके सामने एक सूची रखी है, जिसमें उन देशों के नाम लिखे हैं, जहां अमेरिका पहले सैन्य दखल दे चुका है। इसी के बगल में एक बॉक्स बना है, जिस पर लिखा है “To Do”। इस बॉक्स में चार देशों के नाम दर्ज हैं- बोलिविया, वेनेजुएला, क्यूबा और ईरान।

उस समय इसे अमेरिका-विरोधी व्यंग्य समझा गया था, लेकिन अब वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद लोग कह रहे हैं कि इस सूची का एक नाम सच साबित हो गया। कार्टून को लेकर बहस इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि इसमें दिखाया गया पैटर्न आज की वैश्विक राजनीति से मेल खाता नजर आ रहा है।

कार्टून की “To Do” लिस्ट में शामिल ईरान, क्यूबा और बोलिविया

दरअसल, पिछले कुछ समय से अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा था। इसी बीच शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात अमेरिका ने वेनेजुएला में अचानक बड़ी सैन्य कार्रवाई की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अमेरिकी कमांडो ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले गया। पूरा मिशन करीब डेढ़ घंटे में पूरा किया गया और राजधानी काराकास के कई इलाकों में बिजली गुल होने की खबरें भी सामने आईं।

जैसे ही यह खबर आई, कार्लोस लातुफ ने अपना पुराना कार्टून दोबारा शेयर किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। अब सोशल मीडिया पर लोग सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि कार्टून की “To Do” लिस्ट में शामिल ईरान, क्यूबा और बोलिविया को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि समय और राजनीति के अजीब संयोग के रूप में देखा जा रहा है।

 

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