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यवतमाल: 1400 की आबादी वाले गांव में 27,000 जन्म! यूपी, बिहार और एमपी से 4 और जालसाज गिरफ्तार

Fake Birth Certificate Scam Yavatmal Police Arrest Four More Bihar Up Mp

Shendursani Village Scam: फर्जी जन्म पंजीयन के अंतरराज्यीय मामले की जांच में पुलिस ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों को 14 जनवरी को बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। अब इस घोटाले में शामिल और गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। यह कार्रवाई यहां के उपविभागीय पुलिस अधिकारी की टीम ने की।

गिरफ्तार आरोपियों में ताबिश असगर अली (27), निवासी बिहार, संतोष रमाशंकर गुप्ता (23), निवासी उत्तर प्रदेश, प्रसून प्रेमनारायण कुमावत (22) और शरद श्यामसुंदर जायसवाल (25), दोनों निवासी मध्य प्रदेश शामिल हैं। इससे पहले इसी मामले में पुलिस चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। आर्णी तहसील के शेंदूरसनी ग्राम पंचायत की कुल जनसंख्या मात्र 1400 है।

जन्म पंजीकरण और मृत्यु पंजीकरण के आंकडे़

इसके बावजूद सितंबर 2025 से नवंबर 2026 की अवधि में वहां 27 हजार 397 जन्म पंजीकरण और 7 मृत्यु पंजीकरण दर्ज पाए गए थे। यह गंभीर अनियमितता जिला स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला जन्म-मृत्यु पंजीयक डॉ. सुभाष ढोले के संज्ञान में आने पर उन्होंने यवतमाल शहर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक कुमार चिंता ने इस प्रकरण की जांच उपविभागीय पुलिस अधिकारी दिनेश बैसाने को सौंपी थी। उनके मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने फर्जी जन्म-मृत्यु पंजीकरण करने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया और तीन राज्यों से चार आरोपियों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया।

इस कार्रवाई में पुलिस निरीक्षक यशोधरा मुनेश्वर, एपीआई श्रीकांत जिंदमवार, फौजदार सागर भारस्कर, जमादार गजानन कोरडे, अंसार बेग, मिलिंद दरेकर, विशाल भगत, मोहम्मद भगतवाले, पवन नांदेकर, विकास कन्नर, प्रविण उईके, अजय निंबोलकर, सारंग शेंडे, आकाश खेत्रे, अभिनव बोंदरे, पूजा भारस्कर सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने सहभाग लिया।

20 जनवरी तक पुलिस हिरासत

फर्जी जन्म पंजीयन मामले में गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को आज दोपहर स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस ने न्यायालय से आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए बताया कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के पीछे उनका उद्देश्य क्या था, क्या इसमें और भी आरोपी शामिल हैं।

पंजीकरण के लिए किस प्रकार की तकनीकी सामग्री का उपयोग किया गया और क्या इस घोटाले में स्थानीय आरोपियों की संलिप्तता है। इन सभी बिंदुओं पर गहन पूछताछ आवश्यक है। न्यायालय ने चारों आरोपियों को 20 जनवरी तक यवतमाल पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।

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