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‘तुम्हारे खुदा से बेहतर हमारे PM मोदी’ जावेद अख्तर का बयान वायरल, मुफ्ती से बहस में अल्लाह पर सवाल

‘तुम्हारे खुदा से बेहतर हमारे PM मोदी’ जावेद अख्तर का बयान वायरल, मुफ्ती से बहस में अल्लाह पर सवाल

Javed Akhtar Remark on PM Modi vs God comment: क्या खुदा का वजूद वाकई है? इस गहरे सवाल पर दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक ऐसी बहस हुई जिसने सबको चौंका दिया। मशहूर गीतकार और खुद को नास्तिक कहने वाले जावेद अख्तर और इस्लामी विद्वान मुफ्ती शमाइल नदवी आमने-सामने थे। इसी दौरान जावेद अख्तर ने एक ऐसा बयान दे दिया जो अब सुर्खियों में है। उन्होंने गाजा की तबाही का जिक्र करते हुए सीधे तौर पर कहा कि तुम्हारे खुदा से बेहतर तो हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं जो कम से कम हमारा ख्याल तो रखते हैं।

करीब दो घंटे तक चली इस बहस ने आस्था, तर्क और इंसानियत के कई पहलुओं को छू लिया। खचाखच भरे सभागार में जावेद अख्तर ने विश्वास और आस्था के बीच का फर्क समझाया। उनका कहना था कि विश्वास तो सबूत और तर्क मांगता है, लेकिन आस्था बिना किसी प्रमाण के सब कुछ मान लेने का नाम है। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि आखिर बिना सबूत, बिना गवाह और बिना तर्क के किसी चीज को मानने का दबाव क्यों डाला जाता है? यह सोच इंसान को सवाल पूछने से रोकती है।

गाजा में बच्चों के चीथड़े और खुदा की खामोशी

अपनी दलीलों को मजबूती देने के लिए जावेद अख्तर ने का दर्दनाक उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि अगर खुदा हर जगह मौजूद है और दयालु है, तो वह वहां हो रही तबाही को कैसे नजरअंदाज कर सकता है? उन्होंने पूछा कि क्या खुदा ने वहां बच्चों के चीथड़े उड़ते नहीं देखे? अख्तर ने तंज कसते हुए कहा कि अगर वह सर्वशक्तिमान होकर भी यह सब होने देता है, तो उसका न होना ही बेहतर है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि उस खुदा के मुकाबले हमारे प्रधानमंत्री मोदी ज्यादा बेहतर हैं, जो कुछ तो ख्याल करते हैं।

विज्ञान बनाम धर्म: मुफ्ती का पलटवार

मुफ्ती शमाइल नदवी ने के तर्कों का जवाब देते हुए कहा कि बुराई खुदा ने नहीं, बल्कि इंसान की अपनी मर्जी ने पैदा की है। हिंसा और अपराध इंसान के गलत चुनाव का नतीजा हैं। उन्होंने तर्क दिया कि विज्ञान सिर्फ यह बता सकता है कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है, लेकिन यह नहीं बता सकता कि यह क्यों है। वहीं नैतिकता पर जावेद अख्तर का कहना था कि यह कुदरत की नहीं, बल्कि इंसानों की बनाई व्यवस्था है, ठीक वैसे ही जैसे ट्रैफिक के नियम होते हैं जो समाज के लिए जरूरी हैं मगर प्रकृति में नहीं होते।

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