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दिल्ली के जीटीबी अस्पताल से सात माह का मासूम गायब, CCTV में कैद हुई आरोपी

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल से सात माह का मासूम गायब, CCTV में कैद हुई आरोपी

 उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल परिसर से सात माह का मासूम गायब होने से हड़कंप मच गया। हैरानी की बात यह है कि यह घटना एक सरकारी अस्पताल परिसर में घटी है, जहां चारों तरफ सैकड़ों की संख्या में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। इसके बावजूद अस्पताल परिसर से बच्चा चोरी हो गया।

पीड़ित मां की शिकायत पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली पुलिस जल्द ही मामले का खुलासा कर लेगी। फिलहाल पुलिस जांच अंतिम चरण में है।

मिली जानकारी के अनुसार, थाना पुलिस ने अपहरणकर्ता महिला की पहचान कर ली है। थाना पुलिस को पीड़ित परिवार के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मिली है, जिसमें पीड़ित महिला और आरोपी महिला दोनों बच्चे के साथ नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि घर के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और कपड़ों के आधार पर आरोपी महिला की पहचान कर ली गई है। पुलिस टीम द्वारा मामले का जल्द ही खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। साथ ही बच्चे के साथ फरार हुई महिला की तलाश जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय महिला निवासी सीलमपुर अपने सात माह के बेटे के साथ रहती है। करीब एक सप्ताह पहले उसकी पहचान एक अज्ञात महिला से हुई थी। वह नियमित रूप से उससे मिलती-जुलती रही और धीरे-धीरे उसने बच्चे की मां का भरोसा जीत लिया था।

काफी तलाश के बाद भी बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल पाया, जिसके बाद इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्चे की मां से पूछताछ शुरू कर दी। साथ ही टीम अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अस्पताल में सैकड़ों कैमरे और कई सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, उसी स्थान पर दिनदहाड़े सात माह का बच्चा गायब हो जाना चिंता का विषय बन गया है।

थाना पुलिस का कहना है कि अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही बच्चे और आरोपी महिला की तलाश के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं।

धूप से बचने के लिए गलियों में टेंट या छांव का कोई प्रबंध नहीं किया गया था।

आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील मोड़ों और गेटों पर मेडिकल कैंप या ओआरएस (ORS) काउंटरों का पूरी तरह अभाव था।

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