जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से पुलवामा जिले के अवंतिपुरा क्षेत्र में बन रहे AIIMS के कामकाज की समीक्षा बैठक कई न कई जम्मू कश्मीर में एक नए राजनीतिक विवाद का कारण बन गई हैं. हालांकि, महबूबा मुफ्ती ने आज फिर इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखते हुए आग में घी डालने का काम किया, महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य राजनीति दलों द्वारा उठाए जाने वाले सवालों को दरकिनार करते हुए लिखा कि, मैंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जी से बात की और उनसे AIIMS अवंतीपोरा में चल रहे काम में तेजी लाने का अनुरोध किया ताकि इसमें और देरी न हो. उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि काम समय पर पूरा हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि निस्संदेह, यहां तैनात टीम दिनरात मेहनत कर रही है, लेकिन जम्मूकश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए एम्स अवंतीपोरा का जल्द से जल्द चालू होना अत्यंत आवश्यक है. इससे बहुत जरूरी राहत और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी.
पीडीपी अध्यक्ष द्वारा ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट की समीक्षा लेने पर पीडीपी प्रवक्ता सैय्यद तजामुल इस्लाम का कहना है कि AIIMS का निर्माण मेहबूबा मुफ्ती के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सैयद का एक ड्रीम प्रोजेक्ट था और मेहबूबा मुफ्ती वहां केवल यह देखने गई थी कि इस प्रोजेक्ट के निर्माण में अगर पेंच फंस रहा हैं, तो कहां फंस रहा हैं. तजामुल के मुताबिक पुलवामा और त्राल, दोनों जगहों से पीडीपी के दो चुने हुए विधायक मेहबूबा मुफ्ती के साथ थे और ऐसे फॉलो अप का मुख्य उदेश यही था कि इस बड़े अस्पताल के काम में तेजी लायी जाए ताकि लोगों को समय रहते लाभ मिल पाए.
AIIMS की समीक्षा बैठक से नैशनल कॉन्फ्रेंस हुई गुस्सा
पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के AIIMS समीक्षा बैठक को नैशनल कॉन्फ्रेंस एक विवाद खड़ा करने वाला बता रही है. नैशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक और प्रवक्ता तनवीर सादिक के मुताबिक मेहबूबा मुफ्ती के पीछे कोई हैं, जिसने उनको ऐसा करने का कहा.
तनवीर के अनुसार अगर कोई गैर निर्वाचित व्यक्ति किसी सेंट्रल प्रोजेक्ट पर जाता है, ऐसा करने से वह ऐसे दिखा रही हैं कि कल कोई भी किसी भी जगह ऐसे समीक्षा बैठक के लिए जा सकता है. तनवीर के मुताबिक पीडीपी का जनम ही नेशनल कॉन्फ्रेंस को कमजोर करने के लिए हुआ था और कल जब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने फैसला किया कि वह दिल्ली जाकर दिल्ली को उनका वादा याद दिलाएंगे. इसी बीच एक ऐसे राजनीतिक दल का सक्रिय होकर ऐसा करना, इशारा करता है कि इसके तार कहां जुड़े हुए हैं.
बीजेपी ने भी महबूबा मुफ्ती द्वारा AIIMS समीक्षा बैठक को सही नहीं ठहराया है, उसने कहा कि AIIMS प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट हैं और उन्होंने ही एक AIIMS जम्मू और एक कश्मीर को दिया है और इसपर जैसा पॉलिटिकल ड्रामा यहां की पॉलिटिकल पार्टियां कर रही हैं, खास कर महबूबा जी, AIIMS कोई भी जा सकता हैं, सेल्फी लेने के लिए, अच्छी बात हैं लेकिन रिव्यू बैठक उन्होंने किस कैपेसिटी में वहां की?
बीजेपी वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने पूछा कि महबूबा मुफ्ती पूर्व मुख्यमंत्री हैं इतना भी क्या उनको पता नहीं. पूर्व की कोई संवैधानिक अथॉरिटी नहीं होती, जिसके तहत वह ऐसी बैठक कर सकते हैं. यह केवल एक राजनीतिक ड्रामा हैं खुद को जिंदा रखने के लिए.
जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने उठाए सवाल
जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी महबूबा मुफ्ती पर सवाल करते हुए लिखा, “अब महबूबा जी से एक सवाल है. अगर वो आज किसी केंद्रीय संस्था की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करती हैं, जबकि वो विधायक नहीं हैं, तो आरएसएस या भाजपा के किसी गैरविधायक पदाधिकारी को ऐसी ही बैठकों की अध्यक्षता करने से क्या रोकता है? वे तर्क दे सकते हैं कि उनके पास पीडीपी के 4 विधायकों के मुकाबले 28 विधायक हैं.
उन्होंने आगे कहा, फारूक अब्दुल्ला साहब, आजाद साहब या निर्मल सिंह साहब को ऐसी ही बैठकों की अध्यक्षता करने से क्या रोकता है? यह सूची और भी लंबी हो सकती है और क्या भारत के किसी अन्य हिस्से में ऐसा राजनीतिक विशेषाधिकार उपलब्ध है? क्या जम्मूकश्मीर में निर्वाचित राजनीतिक क्षेत्र मछली बाजार बनने के लिए ही बना है? महबूबा जी ने शायद दूसरों के लिए भी रास्ता खोल दिया है. फिर भी मैं यही कहूंगा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि वो स्वीकार करें कि यह निर्णय लेने में एक त्रुटि थी.
बीजेपी ने भी मेहबूबा मुफ्ती को घेरा
गौरतलब हैं कि शुक्रवार को महबूबा मुफ्ती द्वारा AIIMS में अधिकारियों के साथ बैठक और चल रहे काम का जायजा लेने के बाद ही जम्मू कश्मीर सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू ने बिना मेहबूबा मुफ्ती का नाम लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, “कुछ लोग राजनीतिक विस्मृति से ग्रसित प्रतीत होते हैं. वे अब भी ऐसे व्यवहार करते हैं मानो वे सत्ता में हों, जबकि वे 2018 में सत्ता खो चुके हैं और तब से जनता द्वारा बारबार नकारे जा चुके हैं. आज चुनी हुई सरकार का नेतृत्व माननीय मुख्यमंत्री जेबी उमर अब्दुल्ला कर रहे हैं. फिर भी, यह सवाल उठता है कि पूर्व शासक किस हैसियत से AIIMS अवंतीपोरा परियोजना की समीक्षा कर रहे हैं.”
इत्तू ने आगे कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें ऐसा करने का संकेत कौन दे रहा है? दिल्ली में कौन सा सत्ता केंद्र इन कार्यों को निर्देशित कर रहा है? विडंबना यह है कि जिनके कारण एम्स परियोजना की गति बेहद धीमी रही, वे अब इसकी प्रगति का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं. सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में वर्तमान सरकार के केंद्रित प्रयासों, निगरानी और प्रतिबद्धता के कारण यह परियोजना पूर्णता की ओर अग्रसर है. जम्मूकश्मीर की जनता इतनी समझदार है कि वे विकास में देरी करने वालों और विकास सुनिश्चित करने वालों के बीच अंतर कर सकती है.



