कर्नाटक के नवनियुक्त मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को अपने धर्म और आस्था को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने साफ कहा कि वह न तो अपना हिंदू धर्म त्याग सकते हैं और न ही अपनी पहचान को दरकिनार कर सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि शपथ ग्रहण के दौरान उनका हिंदू रीतिरिवाजों का पालन करना राजनीति नहीं, बल्कि निजी आस्था का प्रतीक था.

3 जून को हुए शपथ ग्रहण समारोह में हिंदू परंपराओं का पालन करने पर सवाल उठने के बाद शिवकुमार ने पत्रकारों से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा मेरे लिए राजनीति महत्वपूर्ण नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति और ईश्वर के बीच का संबंध है. उन्होंने कहा कि मंदिर और आस्था इसी संबंध से जुड़े हैं.
‘मैं सभी धर्मों की संस्थाओं का आदर करता हूं’
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा ‘मैं सभी धर्मों की संस्थाओं का आदर करता हूं, चाहे वे ईसाई हों, सिख हों, बौद्ध हों या हिंदू’. उन्होंने कहा कि सभी आस्था केंद्र लोगों को ईश्वर से जोड़ने का काम करते हैं.
‘हर धर्म के लोग आशीर्वाद मांगते हैं’
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि हर धर्म के लोग महत्वपूर्ण अवसरों पर धार्मिक रीतिरिवाज निभाते हैं और आशीर्वाद लेते हैं. उन्होंने कहा कि राज्य की जिम्मेदारी संभालने से पहले उन्होंने भी इसी तरह सभी धर्मों के धर्मगुरुओं से आशीर्वाद लिया था. उन्होंने कहा, ‘क्या मैं इस राज्य में किसी भी धर्म को छोड़ सकता हूं? क्या मैं अपना नाम बदलकर अपना धर्म त्याग सकता हूं? कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, यूं ही अपना धर्म नहीं छोड़ सकता’. उनके मुताबिक, धर्म व्यक्ति की पहचान का हिस्सा होता है और कोई भी आसानी से अपनी धार्मिक पहचान से अलग नहीं हो सकता.
विकास परियोजनाओं का भी किया जिक्र
धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शिवकुमार ने मल्लघट्टा क्षेत्र में चल रही करीब 35 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों और कडु सिद्धेश्वर मठ के अधिकारियों के साथ क्षेत्र में और विकास कार्यों की संभावनाओं पर चर्चा की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब 25 सालों से मल्लघट्टा स्थित ऐतिहासिक गंगाधेश्वर मंदिर आते रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस स्थान पर आने से उन्हें शांति और खुशी का अनुभव होता है. उनके अनुसार, यह मंदिर उनके लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक संतुलन का केंद्र रहा है.



