नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए OPEC+ देशों के मंत्रियों की आज यानी रविवार को एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक हो रही है। ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं।

इसी संकट से निपटने के लिए संगठन उत्पादन कोटा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा भूराजनीतिक हालातों को देखते हुए ओपेक+ के इस कदम का कीमतों पर शायद ही कोई असर पड़ेगा।
होर्मुज बंद होने से हाहाकार
फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। इसके कारण वैश्विक तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं, जिसने दुनिया भर में महंगाई की नई लहर पैदा कर दी है। दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, जो फिलहाल पूरी तरह ठप है।
उत्पादन बढ़ाने का ऐलान सिर्फ कागजी?
रैस्टैड एनर्जी के विश्लेषक जॉर्ज लियोन के अनुसार, ओपेक प्लस देश अपने उत्पादन कोटे में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की बढ़ोतरी कर सकते हैं। लेकिन असलियत यह है कि 21 सदस्य देशों में से केवल कुछ देशों के पास ही उत्पादन बढ़ाने की वास्तविक क्षमता है।
घट गया उत्पादन
ईरानअमेरिका संघर्ष शुरू होने से पहले ओपेक+ का दैनिक उत्पादन लगभग 4.3 करोड़ बैरल था, जो टैंकरों के फंसे होने के कारण गिरकर 3.3 करोड़ बैरल प्रति दिन रह गया है। डेटा फर्म केपलर के अनुसार ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी के कारण हकीकत में यह उत्पादन इससे भी कहीं कम है।
यूएई के बाहर निकलने से बड़ा झटका
हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ओपेक छोड़ने के फैसले ने इस संगठन की ताकत को काफी कमजोर कर दिया है।
यूएई के पास तेल उत्पादन की भारी अतिरिक्त क्षमता है और वह ओपेक के कड़े नियमों से बंधे बिना अपना रेवेन्यू अधिकतम करना चाहता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर इराक जैसे अन्य देशों ने भी यूएई की राह पकड़ी, तो यह ओपेक+ के अंत की शुरुआत हो सकती है।
चीन बना एकमात्र सहारा
केपलर के विश्लेषक हुमायूं फलकशाही के मुताबिक, इस समय तेल की कीमतों को और अधिक बढ़ने से रोकने वाला इकलौता कारक चीन है। चीन अपनी सामान्य जरूरत से कम तेल खरीद रहा है और इस संकट के दौर में अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडारों का इस्तेमाल कर रहा है।



