Brazil FIFA World Cup 2026: इस वक्त पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों की नजर फीफा वर्ल्ड कप 2026 पर है। इस साल का होने वाले ये फुटबॉल के इस महांकुंभ की शुरुआत 11 जून से होने वाली है। इससे पहले फीफा की तरफ से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार के टूर्मामेंट अब तक सबसे खास फीफा वर्ल्ड कप होने जा रहे है, जिसमें दुनिया कुल 48 टीमें शामिल हैं।

टूर्मामेंट में हर टीम अपने अगल कहानी और लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरेगी। यहां कुछ देश इतिहास रचने का सपना देख रहे हैं तो कुछ अपनी पूराने व गौरवशाली इतिहास को दोहराने की तैयारियों में हैं। आइए एक नजर पहले चार ग्रुपों की प्रमुख टीमों और उनकी संभावनाओं पर डालते हैं।
ग्रुप ए: खिलाड़ी ऐसे कि जो कभी भी कमाल कर जाए
मेक्सिको: मेक्सिको तीसरी बार विश्वकप की मेजबानी करने जा रहा है। घरेलू मैदान पर टीम पहले दो मौकों पर क्वार्टर फाइनल तक पहुंच चुकी है। अनुभवी गोलकीपर गुइलेर्मो ओचोआ अपने छठे विश्वकप में उतर सकते हैं, जबकि लुइस रोमो जैसे खिलाड़ी टीम की ताकत हैं। मेक्सिको नॉकआउट चरण में जगह बनाने का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरिया अपना 11वां विश्वकप खेलेगा। कप्तान सोन ह्युंगमिन के लिए यह आखिरी विश्वकप हो सकता है। टीम 2002 में सेमीफाइनल तक पहुंचने के बाद से कोई बड़ा कारनामा नहीं कर सकी है और इस बार अंतिम16 से आगे बढ़ने का सपना लेकर उतरेगी।
दक्षिण अफ्रीका: दक्षिण अफ्रीका विश्वकप में वापसी कर रही है और नॉकआउट चरण में पहुंचकर नया इतिहास लिखना चाहेगी। कप्तान रोन्वेन विलियम्स के नेतृत्व में टीम की रक्षापंक्ति मजबूत मानी जाती है और वह किसी भी बड़े प्रतिद्वंद्वी को चुनौती देने की क्षमता रखती है।
चेक गणराज्य: चेक गणराज्य की टीम रक्षात्मक अनुशासन के लिए जानी जाती है। कप्तान लादिस्लाव क्रेजी टीम का नेतृत्व करेंगे, जबकि स्ट्राइकर पैट्रिक शिक शानदार फॉर्म में हैं। टीम बड़े मुकाबलों में विपक्षी टीमों को परेशान करने की क्षमता रखती है।
ग्रुप ए की तस्वीर
इस ग्रुप में मेक्सिको और दक्षिण कोरिया को अगले दौर में पहुंचने का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। हालांकि चेक गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका भी उलटफेर करने की क्षमता रखते हैं। ग्रुप का सबसे बड़ा सितारा सोन ह्युंगमिन हैं, जिन्होंने हाल ही में टोटेनहम को 17 साल बाद यूरोपा लीग का खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई थी।
ग्रुप बी: नॉकआउट की दौड़ में जबरदस्त मुकाबला
कनाडा: कनाडा पहली बार विश्वकप की मेजबानी कर रहा है। कोच जेसी मार्श के आने के बाद टीम की खेलने की शैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कनाडा अपने तीसरे विश्वकप में पहली जीत और नॉकआउट चरण में जगह बनाने का लक्ष्य लेकर उतरेगा।
स्विट्जरलैंड: स्विट्जरलैंड इस ग्रुप की सबसे अनुभवी टीम मानी जा रही है। कप्तान ग्रनिट जाका अपना चौथा विश्वकप खेलेंगे। गोलकीपर ग्रेगोर कोबेल यूरोप के सबसे भरोसेमंद गोलरक्षकों में गिने जाते हैं। टीम की सबसे बड़ी ताकत खेल पर नियंत्रण बनाए रखना और कम गलतियां करना है।
कतर: 2022 विश्वकप के अनुभव के बाद कतर का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। कप्तान अक्रम अफीफ एशिया के सबसे रचनात्मक खिलाड़ियों में शामिल हैं। टीम के मुकाबले अक्सर हाईस्कोरिंग रहते हैं, जिससे वह किसी भी विरोधी के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
बोस्निया और हर्जेगोविना: इटली और वेल्स जैसी टीमों को पीछे छोड़कर क्वालिफाई करने वाली बोस्निया और हर्जेगोविना 2014 के बाद विश्वकप में वापसी कर रही है। टीम बड़े उलटफेर करने के लिए जानी जाती है और इस बार भी कई दिग्गज टीमों की राह मुश्किल बना सकती है।
ग्रुप बी की खासियत
ग्रुप बी में नॉकआउट की दौड़ बेहद रोमांचक रहने की उम्मीद है। कनाडा और स्विट्जरलैंड को बढ़त मिल सकती है, लेकिन कतर और बोस्निया भी किसी भी समय समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं। ग्रुप के सबसे बड़े स्टार ग्रनिट जाका हैं, जो स्विट्जरलैंड के लिए सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं।
ग्रुप सी: दिग्गज खिलाड़ियों की है भरमार
ब्राजील: पांच बार की चैंपियन ब्राजील एकमात्र ऐसी टीम है जिसने विश्वकप के हर संस्करण में हिस्सा लिया है। टीम अपने छठे खिताब की तलाश में है। कार्लो एन्सेलोटी ब्राजील का नेतृत्व करने वाले पहले विदेशी कोच हैं और उनके सामने 24 साल का खिताबी सूखा खत्म करने की चुनौती है। नेमार, विनिसियस जूनियर और राफिन्हा जैसे सितारे टीम को बेहद मजबूत बनाते हैं।
मोरक्को: 2022 विश्वकप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचने वाली मोरक्को की टीम अब खुद को दुनिया की शीर्ष टीमों में स्थापित करना चाहती है। कप्तान अचरफ हकीमी टीम के सबसे बड़े सितारे हैं और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिफेंडरों में गिने जाते हैं।
स्कॉटलैंड: 1998 के बाद विश्वकप में वापसी कर रही स्कॉटलैंड के पास बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाने का शानदार मौका है। स्कॉट मैकटोमिने टीम के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में से एक बनकर उभरे हैं।
हैती: 52 वर्षों बाद विश्वकप खेलने जा रही हैती की कहानी प्रेरणादायक है। तेज गति, आक्रामक खेल और जुझारू रवैया टीम की पहचान है। भले ही टीम को कमजोर माना जा रहा हो, लेकिन वह किसी भी मुकाबले को कठिन बना सकती है।
अब ग्रुप सी पर नजर डालिए
इस ग्रुप की सबसे मजबूत टीम है और खिताब की प्रमुख दावेदारों में शामिल है। मोरक्को भी अगले दौर में पहुंचने की मजबूत दावेदार है। हैती फीफा रैंकिंग में सबसे निचले स्थान वाली टीमों में शामिल है, लेकिन उसकी जुझारू शैली उसे खतरनाक बनाती है। नेमार इस ग्रुप के सबसे बड़े आकर्षण होंगे और संभवतः अपना आखिरी विश्वकप खेलेंगे।
ग्रुप डी: लोकल स्पोर्ट और यंग खिलाड़ी
अमेरिका: मेजबान देशों में शामिल अमेरिका को घरेलू मैदान और प्रशंसकों का भरपूर समर्थन मिलेगा। 1930 में तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम इस बार अपनी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के साथ बड़ा प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रही है।
तुर्किये: तुर्किये इस ग्रुप की सबसे ऊंची रैंकिंग वाली टीम है। युवा स्टार अर्दा गुलर टीम की सबसे बड़ी उम्मीद हैं। 24 साल बाद विश्वकप में वापसी कर रही तुर्किये अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार है।
ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया की पहचान कभी हार न मानने वाली टीम के रूप में है। 2006 के बाद से टीम लगातार हर विश्वकप में खेल रही है। पिछली बार वह अंतिम16 तक पहुंची थी और इस बार उससे बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखेगी।
पराग्वे: 2010 के बाद विश्वकप में लौट रही पराग्वे की टीम अपना नौवां विश्वकप खेलेगी। टीम अब तक अंतिम16 से आगे नहीं बढ़ पाई है। डिएगो गोमेज जैसे खिलाड़ियों से उसे काफी उम्मीदें होंगी।
ग्रुप डी में तुर्किये और अमेरिका सबसे बड़े दावेदार
यह एकमात्र ऐसा ग्रुप है जिसमें चारों टीमें फीफा रैंकिंग के शीर्ष 50 के भीतर हैं। तुर्किये और को अगले दौर का दावेदार माना जा रहा है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और पराग्वे भी कड़ी चुनौती देंगे। ग्रुप के सबसे बड़े स्टार अमेरिका के कप्तान क्रिश्चियन पुलिसिक हैं, जिन्हें “कैप्टन अमेरिका” के नाम से जाना जाता है।



