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डायबिटीज मरीजों को मिल सकती है राहत, ट्रायल में सफल हुई नई ओरल GLP-1 दवा

दुनियाभर में डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में अब तक इसके लिए कई मरीज GLP-1 आधारित इंजेक्शन का सहारा लेते थें. लेकिन अब GLP-1 दवा भी आ गई है, जो डायबिटीज के साथ ही मोटापे को भी कंट्रोल करने में मदद कर सकती है.

डायबिटीज मरीजों को मिल सकती है राहत, ट्रायल में सफल हुई नई ओरल GLP-1 दवा

डायबिटीज के इलाज में एक नई उम्मीद सामने आई है. वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई नई ओरल GLP-1 दवा ने क्लीनिकल ट्रायल के दौरान पॉजिटिव रिजल्ट देखने को मिले हैं. खास बात यह है कि यह दवा गोली के रूप में उपलब्ध है, जिससे उन मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है जो अब तक GLP-1 आधारित इंजेक्शन लेने के लिए मजबूर थे. शुरुआती ट्रायल में पाया गया कि यह दवा न केवल ब्लड शुगर लेवल को प्रभावी ढंग से कंट्रोल करने में मदद करती है, बल्कि वजन घटाने में भी असरदार साबित हो सकती है.

दुनियाभर में डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच इस तरह की नई दवाओं का विकास बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अगर शुरुआती चरणों के ट्रायल भी सफल रहते हैं, तो यह ओरल GLP-1 दवा डायबिटीज मैनेजमेंट के तरीके को बदल सकती है और मरीजों को इंजेक्शन के बजाय एक आसान, सुविधाजनक और प्रभावी उपचार ऑप्शन प्रोवाइड करा सकती है.

ट्रायल में क्या सामने आया?

एस्ट्राजेनेका द्वारा प्रायोजित फेज-2बी SOLSTICE ट्रायल में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित 406 वयस्कों को शामिल किया गया. यह अध्ययन नौ देशों में 26 हफ्ते तक चलाया गया. शोधकर्ताओं के अनुसार, ट्रायल में शामिल प्रतिभागियों ने दवा को अच्छी तरह सहन किया और इसके परिणाम वर्तमान में उपलब्ध कुछ उपचार ऑप्शनों के बराबर या उनसे बेहतर नजर आए हैं.

वजन घटाने में भी मिला फायदा

अध्ययन में यह भी पाया गया कि एलेकोग्लिप्रोन केवल ब्लड शुगर कंट्रोल तक सीमित नहीं है. दवा लेने वाले 72.3 प्रतिशत प्रतिभागियों का वजन कम से कम 5 प्रतिशत तक घटा, जबकि प्लेसीबो समूह में यह आंकड़ा 20.2 प्रतिशत रहा. इससे ये मान सकते हैं कि ये दवा मोटापे के इलाज में भी उपयोगी साबित हो सकती है.

क्या हैं इसके साइड इफेक्ट्स?

शुरुआती ट्रायल में दवा की सेफ्टी प्रोफाइल अन्य GLP-1 दवाओं जैसी ही पाई गई. सबसे आम साइड इफेक्ट्स में मतली, उल्टी और मल त्याग की आदतों में बदलाव शामिल थे. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दवा की सुरक्षा और लंबे समय तक इसके प्रभावों को समझने के लिए बड़े स्तर पर फेज-3 ट्रायल की जरूरत होगी.

भारत के लिए क्यों है अहम?

भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है. भारतीयों में अक्सर कम बॉडी मास इंडेक्स (BMI) होने के बावजूद शरीर में ज्यादा चर्बी और इंसुलिन रेजिस्टेंस देखने को मिलता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी दवाएं, जो एक साथ ब्लड शुगर को कंट्रोल करें, वजन घटाएं और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाएं, भारतीय मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती हैं. अगर शुरुआती फेज-3 ट्रायल भी सफल रहते हैं, तो एलेकोग्लिप्रोन डायबिटीज के इलाज के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है.

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