
लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल न रहने के कारण डायबिटीज के मरीजों में ‘डायबिटीज न्यूरोपैथी यानी नसों का कमजोर होना या डैमेज होने का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। इसके कारण हाथों-पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट और तेज दर्द की शिकायत होने लगती है। बीमारी को कंट्रोल करने के लिए दवाओं और सही डाइट का सेवन करना बेहद जरूरी है। हालिया मेडिकल रिसर्च और योग विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित रूप से सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है और नसों को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिलती है।
टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए सूर्य नमस्कार एक बेहद असरदार उपाय साबित हो सकता है। अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स में आयोजित अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत एक भारतीय बहु-केंद्रित (मल्टीसेंट्रिक) अध्ययन में पाया गया कि नियमित और एक्सपर्ट की निगरानी में किया गया सूर्य नमस्कार डायबिटीज से जुड़ी नसों की एक गंभीर समस्या, कार्डियक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी (CAN), में सुधार ला सकता है। यह भारतीय मल्टिसन्ट्रिक अध्ययन Dr Shashank Joshi (एंडोक्राइनोलॉजिस्ट) और Dr Shambo Samrat Samajdar (डायबिटोलॉजिस्ट) द्वारा प्रस्तुत किए गए। इन दोनों विशेषज्ञों की टीम द्वारा किए गए अध्ययन के निष्कर्षों को 2026 में आयोजित American Diabetes Association Annual Meeting 2026 में प्रस्तुत किया गया।
यह अध्ययन उन वयस्कों पर किया गया था जिन्हें टाइप-2 डायबिटीज के साथ कार्डियक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी की पुष्टि हो चुकी थी। यह ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय गति और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाली नसें प्रभावित हो जाती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों ने सामान्य डायबिटीज उपचार के साथ नियमित रूप से सूर्य नमस्कार किया, उनमें नसों की कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार देखा गया।
क्या है कार्डियक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी?
ऑटोनोमिक फंक्शन शरीर की वह स्वचालित प्रणाली है जो हृदय गति, ब्लड प्रेशर, श्वसन और पाचन जैसी जरूरी गतिविधियों को कंट्रोल करती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़े रहने से डायबिटीज के मरीजों में ये नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे शरीर की हृदय संबंधी कार्यों को कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित होती है।
सूर्य नमस्कार कैसे करता है असर
सूर्य नमस्कार 12 योग मुद्राओं का एक क्रम है, जिसे नियंत्रित श्वास के साथ किया जाता है। उसमें लचीलापन, ताकत, संतुलन और ध्यान का समावेश होता है। शोधकर्ताओं ने रिसर्च को प्रमाणित करने के लिए 90 टाइप-2 डायबिटीज मरीजों को शामिल किया। ये रिसर्च छह महीने तक चली जिसमें 47 लोगों ने सामान्य उपचार के साथ सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया, जबकि 43 प्रतिभागियों ने केवल नियमित चिकित्सा देखभाल जारी रखी। रिसर्च में शामिल प्रतिभागियों को रोजाना 12 राउंड सूर्य नमस्कार करवाया गया।
ये अभ्यास हर इंसान की उम्र,फिटनेस और मेडिकल कंडीशन को ध्यान में रखते हुए कराया गया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक रिसर्च के नतीजे काफी उत्साहजनक रहे। सूर्य नमस्कार करने वाले समूह के 25.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में कार्डियक ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी की स्थिति सामान्य नसों की कार्यक्षमता में बदल गई, जबकि दूसरे समूह में यह आंकड़ा केवल 7 प्रतिशत था।
शोधकर्ताओं ने हृदय संबंधी नसों की कार्यक्षमता को मापने वाले महत्वपूर्ण संकेतकों जैसे वल्साल्वा रेशियो (Valsalva Ratio) और ई रेशियो (E Ratio) में भी सुधार दर्ज किया। ये दोनों मापदंड बताते हैं कि ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम हृदय की गतिविधियों को कितनी प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर रहा है।
सूर्य नमस्कार करने वाले प्रतिभागियों की सेहत में मिला सुधार
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों ने रोज सूर्य नमस्कार किया उनमें चिंता (Anxiety) और अवसाद (Depression) के स्कोर में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई। रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि सूर्य नमस्कार करने से सिर्फ शारीरिक फायदे ही नहीं बल्कि मानसिक सुख भी मिलता है। सूर्य नमस्कार करने से HbA1c यानी पिछले तीन महीनों की औसत ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल या लिवर एंजाइम में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं हुआ। इससे संकेत मिलता है कि अध्ययन में शामिल लोगों के लिए यह अभ्यास सुरक्षित था।
योग और दवाओं का कॉम्बिनेशन डायबिटीज पर कैसा करता है असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य नमस्कार दवाओं, ब्लड शुगर मॉनिटरिंग, संतुलित आहार और नियमित मेडिकल फॉलो-अप का विकल्प नहीं है। इसे लाइफस्टाइल में बदलाव के रूप में अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, यह अध्ययन शुरुआती स्तर का है और इसके परिणामों की पुष्टि के लिए बड़े और दीर्घकालिक शोधों की आवश्यकता है। फिर भी यह शोध संकेत देता है कि योग और आधुनिक चिकित्सा का संतुलित कॉम्बिनेशन डायबिटीज देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सूर्य नमस्कार शुरू करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
- सूर्य नमस्कार शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
- अगर आपको हृदय रोग, डायबिटीज की जटिलताएं, चक्कर आने की समस्या, आंखों की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर है तो आप खासतौर पर सावधानी बरतें।
- शुरुआत में किसी योग्य योग प्रशिक्षक की निगरानी में ही अभ्यास करें।
- अपनी उम्र, वजन, लचीलेपन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अभ्यास की तीव्रता तय करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना डायबिटीज की दवाएं बंद न करें।
डिस्क्लेमर:यह लेख अध्ययन और विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। किसी भी नई व्यायाम या योग दिनचर्या को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।



