
भारतीय जनता पार्टी में बड़े संगठनात्मक और राजनीतिक बदलावों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष नेताओं की मैराथन बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई केंद्रीय टीम का ऐलान कभी भी किया जा सकता है. सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जी-7 शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है. इसके साथ ही केंद्र सरकार और राज्यपालों के स्तर पर भी महत्वपूर्ण फेरबदल की संभावना जताई जा रही है.
भाजपा सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सरकारी आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी अरुण कुमार और शिव प्रकाश सहित कई शीर्ष नेता मौजूद रहे. बैठक करीब चार घंटे तक चली और आधी रात के बाद समाप्त हुई. राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को भाजपा के आगामी संगठनात्मक पुनर्गठन और व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
सूत्रों का कहना है कि बैठक में केवल संगठनात्मक बदलावों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि सरकार और संवैधानिक पदों से जुड़े संभावित फेरबदल पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. भाजपा नेतृत्व आने वाले चुनावी वर्षों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर नई रणनीति तैयार कर रहा है.
पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि अधिक मास की अवधि 15 जून को समाप्त हो चुकी है. परंपरागत रूप से भाजपा और उससे जुड़े कई संगठन इस अवधि में बड़े राजनीतिक या संगठनात्मक फैसलों से बचते हैं. ऐसे में अब संगठनात्मक बदलावों की घोषणा के लिए रास्ता साफ हो गया है. हालांकि यह भी संभव है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 19 जून को विदेश दौरे से लौटने के बाद ही अंतिम घोषणाएं की जाएं.
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को लेकर पार्टी के भीतर लंबे समय से चर्चा चल रही है. माना जा रहा है कि नई टीम में 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छह राष्ट्रीय महासचिवों के पदों पर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं. पार्टी इस बार संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दे रही है. महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न जातीय समूहों को भी पर्याप्त स्थान दिए जाने की संभावना है.
सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है. नई टीम में ऐसे नेताओं को अवसर दिया जा सकता है जिन्होंने संगठनात्मक स्तर पर उल्लेखनीय काम किया है. साथ ही कई वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का भी लाभ उठाने की योजना बनाई जा रही है.
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा उन राज्यों को भी विशेष महत्व देने की तैयारी में है जहां अगले वर्ष चुनाव होने हैं. गुजरात, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी संगठन में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि चुनावी राज्यों के प्रभावशाली नेताओं को संगठन में ऐसी जिम्मेदारियां दी जाएं जो आगामी चुनावों में लाभकारी साबित हों.
भाजपा के केंद्रीय संगठन में पिछले छह वर्षों से बड़े बदलाव नहीं हुए हैं. जनवरी 2020 में जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद गठित टीम में अधिकांश पदाधिकारी अब तक अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. ऐसे में नितिन नवीन के नेतृत्व में बनने वाली नई टीम को भाजपा संगठन के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.
पार्टी ने हाल के दिनों में कई नेताओं की भूमिकाओं में बदलाव कर संकेत भी दिए हैं कि संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसी महीने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और तरुण चुघ को राज्यसभा भेजा गया है. इनके साथ राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर और राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को भी उच्च सदन में स्थान मिला है.
दूसरी ओर राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को राज्यसभा का नया कार्यकाल नहीं दिया गया है. वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने जा रहा है. इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह भी नवंबर में राज्यसभा से सेवानिवृत्त होने वाले हैं. ऐसे में कई पदों पर नए चेहरों के आने की संभावना बढ़ गई है.
भाजपा के भीतर यह भी चर्चा है कि मौजूदा राष्ट्रीय महासचिवों में से कुछ नेताओं को सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है. विनोद तावड़े और तरुण चुघ जैसे नेताओं को संगठन में उनकी प्रभावी भूमिका और राजनीतिक प्रबंधन क्षमता के लिए जाना जाता है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे नई टीम में बने रहते हैं या फिर उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री पद जैसी नई जिम्मेदारी सौंपी जाती है.
सूत्रों का यह भी कहना है कि पिछले छह वर्षों में संगठन के लिए काम करने वाले कई वरिष्ठ नेताओं को राज्यपाल पदों या विभिन्न आयोगों, बोर्डों और अर्ध-सरकारी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर सम्मानित किया जा सकता है. इसी कारण राज्यपालों के स्तर पर भी बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं.
भाजपा नेतृत्व आगामी चुनावी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संगठन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना चाहता है. पार्टी का फोकस केवल चुनावी सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक संगठनात्मक विस्तार और नए नेतृत्व को आगे लाने पर भी है. यही वजह है कि नई टीम में युवा चेहरों और अनुभवी नेताओं का मिश्रण देखने को मिल सकता है.
सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की करीब एक दर्जन सीटों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने जा रहा है. ऐसे में जिन वरिष्ठ नेताओं को नई संगठनात्मक टीम में स्थान नहीं मिलेगा, उन्हें राज्यसभा के माध्यम से समायोजित किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है. इससे पार्टी नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों के नेताओं को संतुलित तरीके से अवसर देने की रणनीति पर काम कर सकेगा.
राजनाथ सिंह के आवास पर हुई देर रात की बैठक के बाद भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की निगाहें अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वापसी और उसके बाद होने वाली संभावित घोषणाओं पर टिकी हुई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में भाजपा संगठन, केंद्र सरकार और राज्यपालों के स्तर पर ऐसे फैसले सामने आ सकते हैं जो आगामी वर्षों की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.



