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चंदा चोरी विवाद के बीच 7.30 घंटे अयोध्या में रुकेंगे CM योगी! प्रशासनिक निर्देश के जरिए चंपत राय से बनाई दूरी

Yogi Adityanath Visit Ram Mandir: उत्तर प्रदेश में अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी मामला गहराता जा रहा है। इस बीच सीएम योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा अहम माना जा रहा है। आज योगी आदित्यनाथ पूरे 7.30 घंटे अयोध्या में बिताने वाले है। इस दौरान वे रामलला के दर्शन करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर जारी एक प्रशासनिक निर्देश चर्चा में आ गए है।

चंदा चोरी विवाद के बीच 7.30 घंटे अयोध्या में रुकेंगे CM योगी! प्रशासनिक निर्देश के जरिए चंपत राय से बनाई दूरी
चंदा चोरी विवाद के बीच 7.30 घंटे अयोध्या में रुकेंगे CM योगी! प्रशासनिक निर्देश के जरिए चंपत राय से बनाई दूरी

जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल कार्यक्रम जारी किया गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से अनुरोध किया गया है कि वे मुख्यमंत्री के दर्शन और पूजा कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की देखरेख के लिए एक अधिकृत प्रतिनिधि को नामित करें।

दर्शनपूजन की पूरी तैयारी

मुख्यमंत्री का रामलला के दर्शनपूजन के कार्यक्रम के लिए ट्रस्ट की ओर से किसी प्रतिनिधि का नाम और संपर्क विवरण ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, ताकि प्रोटोकॉल की तैयारी की जा सके। प्रशासन इसे सामान्य व्यवस्था बता रहा है, लेकिन राम मंदिर के चढ़ावा घोटाले में एसआईटी की जांच ने कई चर्चाओं को जन्म दिया।

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में सामने आए घटनाक्रमों के बाद शासन और प्रशासन राम मंदिर से जुड़े प्रत्येक पहलू को अत्यंत सतर्कता के साथ देख रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में महासचिव की प्रत्यक्ष भूमिका न होने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलगअलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।

चंपत राय से नजर आ सकती हैं दूरियां

अगर मुख्यमंत्री के राम मंदिर दौरे के दौरान किसी अहम सार्वजनिक भूमिका में नजर नहीं आते हैं, तो चल रही जांच के बीच इसे एक अहम संकेत माना जाएगा। इससे यह पता चल सकता है कि सरकार चंदे में गड़बड़ी की जांच को बहुत गंभीरता से ले रही है और जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने के बजाय संस्थागत प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दे रही है।

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इससे सरकार का यह इरादा भी जाहिर हो सकता है कि वह मंदिर से जुड़ी आस्था और उससे जुड़े विवादों के बीच फर्क करना चाहती है। मुख्यमंत्री राम लल्ला की पूजाअर्चना करेंगे और भक्तों व साधुसंतों के समुदाय के साथ अपना जुड़ाव दिखाएंगे, लेकिन साथ ही वे विवादों के केंद्र में रहे लोगों से औपचारिक दूरी बनाकर पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर करेंगे।

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