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International Yoga Day: योग का कितना बड़ा है कारोबार, भारत में हो चुका है इतना विस्तार

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है. आज योग केवल एक सांस्कृतिक या आध्यात्मिक परंपरा नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा सेक्टर बन चुका है. प्राचीन भारतीय ज्ञान से निकला योग अब दुनियाभर में एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले चुका है, जिसका असर हेल्थ, वेलनेस, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज्म जैसे कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है. सरकार की नीतियों, बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस और बदलती जीवनशैली के चलते भारत ग्लोबल वेलनेस मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है. आइए जानते हैं कि योग का कारोबार आज कितना बड़ा हो चुका है, भारत में इसका विस्तार किन क्षेत्रों तक पहुंचा है और इससे कौनकौन से सेक्टर को इसका फायदा हो रहा है.

International Yoga Day: योग का कितना बड़ा है कारोबार, भारत में हो चुका है इतना विस्तार

भारतीय योग बाजार का फाइनेंशियल लैंडस्केप और ग्रोथ रेट

भारतीय योग इंडस्ट्री का बाजार मूल्य पिछले कुछ वर्षों में बेहतरीन तरीके से बढ़ा है. रिचर्स रिपोर्टों के अनुसार, साल 2023 में भारत का योग बाजार लगभग 5.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर लगभग 5.3 लाख करोड़ रुपये आंका गया था, जिसके लगभग 12% की CAGR से बढ़ते हुए वर्ष 2030 तक 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है. विभिन्न बाजार विश्लेषकों ने इस ग्रोथ को अलगअलग तरीके से आंका है.

मार्केट सेगमेंटवैल्यू और पीरियडCAGR ग्रोथ
भारत योग बाजार5 लाख करोड़ से करीब 10 लाख करोड़10.2%
भारतीय वेलनेस टूरिज्म27 लाख करोड़ से करीब 42 लाख करोड़7.18%
वैश्विक योग बाजारUSD 125.82 बिलियन से USD 297.86 बिलियन9.00%
भारतीय फिटनेस बाजार16,200 करोड़ से करीब 37,700 करोड़15.0%

सोर्स Grand View Research, Deloitte India & HFA, Mordor Intelligence, Expert Market Research

इस बाजार विकास को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारकों में हेल्थ अवेयरनेस, तनाव से जुड़ी लाइफस्टाइल डिजीज और योग को शारीरिकमानसिक स्वास्थ्य के लिए एक होलिस्टिक अप्रोच के रूप में स्वीकार किया जाना शामिल है.

डिजिटल इनोवेशन, स्टार्टअप कल्चर और कंज्यूमर डेमोग्राफिक्स

भारतीय योग बाजार में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों सेगमेंट के बीच डायनेमिक बैलेंस बन रहा है. साल 2025 में ऑफलाइन योग पाठ्यक्रमों की बाजार हिस्सेदारी लगभग 73.45% के साथ सबसे अधिक थी, लेकिन व्यस्त टाइम टेबल और लचीलेपन की मांग के कारण ऑनलाइन योग सेगमेंट सबसे तेजी से विकसित हो रहा है.

इस डिजिटल विस्तार ने नए बिजनेस मॉडल और स्टार्टअप्स को जन्म दिया है. उदाहरण के लिए, भारतीय स्टार्टअप ‘हेबिल्ड’ ने बिना किसी जटिल मोबाइल ऐप के, केवल व्हाट्सएप जैसे सरल संचार माध्यमों का उपयोग करके मध्यम आयु वर्ग की भारतीय महिलाओं को लक्षित किया और छह वर्षों के भीतर 100 करोड़ रुपये का बूटस्ट्रैप्ड सब्सक्रिप्शन बिजनेस खड़ा कर दिया. इसी तरह कल्ट.फिट और हेल्थिफाईमी जैसी कंपनियां योग को डिजिटल वेलनेस सॉल्यूशंस के साथ जोड़ रही हैं. कंज्यूमर डेमोग्राफिक्स के अनुसार, भारत में 30 से 50 वर्ष का आयु वर्ग और महिला उपभोक्ता योग सेवाओं के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं. वहीं, 18 से 29 वर्ष के युवा वर्ग में भी 11% वार्षिक ग्रोथ रेट के साथ योग की स्वीकार्यता बढ़ रही है.

योग एक्सेसरीज की मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल इकोनॉमी

योग के व्यावसायिक विस्तार ने एक्सेसरीज, विशेषकर योग मैट और योग अपैरल के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारी तेजी ला दी है. भारत में योग मैट का बाजार वर्ष 2025 में 1.46 बिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था, जिसके 4.94% CAGR के साथ वर्ष 2034 तक 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

मार्केट इंडीकेटर्सवैल्यू और डिटेलप्रोजेक्टेड पीरियड
भारतीय योग मैट बाजारUSD 1.46 बिलियन से USD 2.3 बिलियनCAGR 4.94%
वैश्विक योग मैट बाजार वृद्धि दर8.0% CAGR20262036
प्राइमरी कंज्यूमर एज ग्रुप3050 वर्ष2025
जेंडर बेस्ड शेयरमहिला उपभोक्ता2025
बूटीक फिटनेस, योग ग्रोथ रेट18.8% CAGR20242030

सोर्स IMARC Group, Fact. MR, Grand View Research, Deloitte India & HFA

उपभोक्ताओं का झुकाव अब इकोफ्रेंडली और सस्टेनेबल उत्पादों की ओर बढ़ रहा है, जिससे प्राकृतिक रबर, कॉर्क, कपास और जूट से बने योग मैट की मांग बढ़ रही है. इसी तरह, अपैरल इंडस्ट्री में एथलीजर ट्रेंड के कारण लोचदार और पसीना सोखने वाली तकनीक से लैस कपड़ों का बाजार बढ़ रहा है.

वेलनेस टूरिज्म, आयुष वीजा और गवर्नमेंट इनिशिएटिव्स

भारत का योग केवल घरेलू सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और वेलनेस टूरिज्म का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है. उत्तराखंड का ऋषिकेश शहर, जिसे “विश्व की योग राजधानी” कहा जाता है, इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है. योग टूरिज्म के कारण ऋषिकेश में एनुअल बेसिस पर ₹42 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू उत्पन्न हुआ है और स्थानीय डायरेक्ट एवं इनडायरेक्ट रोजगार में 31% की वृद्धि हुई है. इस ग्लोबल डिमांड को सपोर्ट करने के लिए भारत सरकार ने पॉलिसी लेवल पर कई बड़े कदम उठाए हैं.

  1. आयुष वीजा सरकार ने 27 जुलाई 2023 को विदेशी नागरिकों के लिए एक विशेष ‘आयुष वीजा’ श्रेणी की शुरुआत की. इसके तहत विदेशी नागरिकों को भारत के मान्यता प्राप्त आयुष अस्पतालों और वेलनेस केंद्रों में पारंपरिक चिकित्सा, योग और ध्यान पद्धतियों के लिए एक वर्ष तक रुकने की अनुमति दी जाती है. इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2025 की पहली छमाही में 2.3 लाख आयुष रिलेटेड फॉरेन एंट्रीज दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15% अधिक हैं.
  2. ‘हील इन इंडिया’ अभियान और बजट अलोकेशन केंद्रीय बजट 202526 के तहत सरकार ने “हील इन इंडिया” पहल के लिए 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर लगभग 20,000 करोड़ रुपये का बजट अलोकेशन किया है, जो आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को ग्लोबल सर्विसेज के रूप में स्थापित करता है. कुल मिलाकर, भारतीय आयुष बाजार वर्ष 2014 के 2.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2023 तक 43.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, और इसके वर्ष 2030 तक 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

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