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अपने ही बेटे की मौत की आरोपी मां को जेल क्यों नहीं भेजा गया? जानिए पूरा मामला..

अपने ही बेटे की मौत की आरोपी मां को जेल क्यों नहीं भेजा गया? जानिए पूरा मामला..

England Mother Killed Her Son: इंग्लैंड में एक महिला ने अपने आठ साल के बेटे को ब्लैक करंट जूस में जहर मिलाकर इसलिए मार डाला, क्योंकि वह एक साथ मरना चाहती थी.इस सच्चाई के सामने आने के बाद अब महिला को अनिश्चितकाल के लिए अस्पताल में रखने का आदेश दिया गया है. लुईस कैमरन (42) ने सितंबर, 2026 में बिलिंगहम टीसाइड में अपने घर पर अपने बेटे राइस की हत्या कर दी थी. टीसाइड क्राउन कोर्ट को सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि कैमरन की मां और बहन को वो दोनों अपने बेडरूम में मिले. इससे साफ है कि राइस की मौत कुछ समय पहले ही हो चुकी थी.

पुलिस जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि मौत के समय लुईस कैमरन मानसिक बीमारी के दौर से गुजर रही थीं. उन्हें यकीन था कि उनके तीनों बच्चों को बच्चों का शोषण करने वाला एक गिरोह छीन लेगा. शुरुआत में लुईस पर हत्या का आरोप लगाया गया था, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने या मुकदमे का सामना करने के लिए अयोग्य पाया गया. 

उधर, सुनवाई के दौरान कोर्ट में परिवार की ओर से की गई एक दिल दहला देने वाली 999 कॉल सुनाई गई, जिसमें वो मदद की गुहार लगा रहे थे. यहां पर बता दें कि बेटे को चलने-फिरने और सीखने में दिक्कतें थीं. रिकॉर्डिंग में कॉलर को ऑपरेटर से यह कहते हुए सुना जा सकता था कि राइस की मौत हो चुकी है, जबकि ऑपरेटर उन्हें CPR करने के लिए कह रहे थे. 

घर में की बेटे की हत्या

उन्होंने ऑपरेटर को बताया कि कैमरन बिस्तर पर राइस के साथ थीं और हो सकता है कि उसने ही ऐसा किया हो, लेकिन मुझे पक्का नहीं पता. 42 साल की लुईस कैमरन ने पिछले साल सितंबर में बिलिंगहम, टीसाइड में अपने घर पर अपने बेटे राइस की हत्या कर दी थी. 42 साल की लुईस कैमरन ने पिछले साल सितंबर में बिलिंगहम, टीसाइड में अपने घर पर अपने बेटे राइस की हत्या कर दी थी. राइस की बुआ ने बताया कि कैसे वह अपनी ज़िंदगी में सभी के लिए ‘खुशी’ लेकर आया था. 

स्पेशल चाइल्ड था राइस 

कोर्ट में राइस की बुआ का बयान पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उनका भतीजा अपनी जिदगी में सभी के लिए ‘खुशी’ लेकर आया था. रीस की जान जब गई, तब वह सिर्फ आठ साल का था. वह एक अनोखी पर्सनैलिटी वाला छोटा बच्चा था. दुनिया को देखने का उसका अपना नजरिया था.

परिवार बोला- सिर्फ अब यादें जिंदा

‘रीस ऑटिस्टिक था, लेकिन ऑटिज़्म ही उसकी पहचान नहीं थी. वह ऐसा बच्चा था जिसे प्यार, सुरक्षा, समझ और बड़े होने का मौका मिलना चाहिए था. ‘रीस के आस-पास ऐसे लोग थे जो उसकी बहुत परवाह करते थे. जो लोग उसे जानते थे, उनके लिए वह खुशियां लाता था – उसकी मुस्कान, आवाज़, उसकी पसंद-नापसंद, उसकी आदतें और वे बातें जो उसे खास बनाती थीं. अब ये सिर्फ़ यादें हैं जिन्हें हम संजोकर रखते हैं, क्योंकि अब हमें उसके साथ नई यादें बनाने का मौका कभी नहीं मिलेगा.

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