Agra Farmers Protest For land acquisition compensation: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान उस समय अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो गई जब अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नाराज किसानों ने कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी के काफिले को रोकने का प्रयास किया और उनकी गाड़ी के सामने सड़क पर बैठ गए। यह पूरा घटनाक्रम आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं किसान दिवस कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुरानी समस्याओं और मांगों को सुनने के लिए नहीं की गई व्यवस्था
जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे थे। किसानों का आरोप है कि उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित तो किया गया, लेकिन उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं और मांगों को सुनने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
इसी बात से नाराज होकर किसान नेता श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में कई किसान मंत्री के काफिले के सामने बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया। किसानों का कहना है कि उनकी आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण मांगें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन शासन और प्रशासन स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
भूमि अधिग्रहण का नहीं मिला उचित मुआवजा
किसानों ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के लिए उनकी भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया, लेकिन आज तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल सका है। इसके अलावा आलू उत्पादक किसानों ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बाजार में आलू का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है और परिवार का भरणपोषण करना मुश्किल हो गया है।
भाजपा जिलाध्यक्ष के समझाने के बाद शांत हुए किसान
कार्यक्रम स्थल पर भी किसानों की नाराजगी साफ दिखाई दी। जैसे ही मंत्री का काफिला निकलने लगा, किसान सड़क पर बैठ गए। स्थिति को देखते हुए प्रशांत पौनिया मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। बाद में उन्होंने किसानों की मुलाकात कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी से कराई, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
किसानों का कहना है कि मंत्री ने उनकी समस्याओं को सुनने और भविष्य में विस्तृत बैठक कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। हालांकि किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
घटना का वीडियो पर वायरल होने के बाद यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दल भी इसे किसानों की नाराजगी और कृषि संबंधी समस्याओं से जोड़कर सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में यह घटना केवल आगरा तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश की किसान राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाली साबित हो सकती है।



