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भारत के iPhone मिशन को झटका? टाटा फैक्ट्री के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा

तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की iPhone पार्ट्स बनाने वाली फैक्ट्री एक नए विवाद में फंस गई है. किसानों की शिकायतों के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल का आसपास के खेतों और लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा है. कुछ किसानों का आरोप है कि दूषित पानी की वजह से उनकी फसलें प्रभावित हुई हैं और लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं भी देखने को मिली हैं.

भारत के iPhone मिशन को झटका? टाटा फैक्ट्री के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत Apple के लिए एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. होसुर स्थित यह फैक्ट्री 2021 में शुरू हुई थी और यहां iPhone के बैक कवर समेत कई महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण किया जाता है.

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में गंभीर संकेत

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के अंत से स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं. एक सरकारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल के कारण क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है और पानी जानवरों के पीने योग्य नहीं रह गया है.

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि फैक्ट्री का अपशिष्ट जल आसपास की कृषि भूमि और कुओं के स्वच्छ पानी को दूषित कर रहा है. किसानों की शिकायतों के आधार पर लिए गए पानी के नमूनों में ईकोलाई बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो आमतौर पर सीवेज या मलमूत्र से होने वाले जल प्रदूषण का संकेत माना जाता है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

टाटा ने आरोपों को किया खारिज

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा फैक्ट्री परिसर से लिए गए पानी के नमूनों की जांच में किसी भी प्रकार के प्रदूषण के संकेत नहीं मिले हैं. कंपनी का दावा है कि बोर्ड ने अपनी जांच प्रक्रिया भी समाप्त कर दी है.

सूत्रों के अनुसार, दिसंबर 2025 में फैक्ट्री के जल शोधन संयंत्र में एक पंप खराब हो गया था, जिससे उपचारित सीवेज का कुछ हिस्सा बाहर निकल गया था. हालांकि कंपनी का कहना है कि समस्या का तुरंत समाधान कर लिया गया था.

भारत के iPhone निर्माण मिशन के लिए अहम मामला

यह विवाद सिर्फ स्थानीय पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत की उस महत्वाकांक्षा से भी जुड़ा है जिसके तहत देश Apple के लिए चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 तक दुनिया के करीब 26 प्रतिशत iPhone भारत में बनाए जा सकते हैं. ऐसे में टाटा फैक्ट्री से जुड़ा यह मामला उद्योग, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है.

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