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आम जनता पर नहीं आएगी आंच! मिडल ईस्ट संकट के बीच भारत ने बदला LPG इंपोर्ट रूट, तेल कंपनियों ने संभाला मोर्चा

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान भारत ने अपनी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की खरीद के स्रोतों में काफी बदलाव किया. खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका, ईरान और कई अन्य देशों से इंपोर्ट बढ़ाया गया, जबकि सरकारी फ्यूल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाया ताकि आम घरों पर इसका असर न पड़े. संघर्ष से पहले, भारत का लगभग 90 प्रतिशत LPG आयात पश्चिम एशियाई सप्लायर्स से होता था, जिससे देश पर क्षेत्रीय रुकावटों का काफी असर पड़ने का खतरा था. क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 तक भारत के कुल LPG इंपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग एकतिहाई हो गई, जो फरवरी में सिर्फ 8 प्रतिशत थी.

आम जनता पर नहीं आएगी आंच! मिडल ईस्ट संकट के बीच भारत ने बदला LPG इंपोर्ट रूट, तेल कंपनियों ने संभाला मोर्चा

अमेरिका समेत कई देशों से बढ़ी सप्लाई

इस बदलाव में 2025 के आखिर में अमेरिका के साथ हुए सालाना 2.2 मिलियन टन LPG सप्लाई के समझौते ने मदद की. यह मात्रा भारत की सालाना इंपोर्ट जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत है. ईरान भी भारत के आयात स्रोतों में फिर से शामिल हुआ और अप्रैल के आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत रही, जबकि अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों से भी सप्लाई की गई. सप्लाई के स्रोतों में इस विविधता से संघर्ष के दौरान सप्लाई बनाए रखने में मदद मिली, लेकिन इसके लिए लंबी सप्लाई चेन और ज्यादा ढुलाई खर्च का बोझ उठाना पड़ा. इसके बावजूद, रुकावटों का मांग पर भारी असर पड़ा. सप्लाई में कमी और बढ़ती कीमतों के कारण इस्तेमाल घटने से अप्रैल में LPG की खपत फरवरी के 3.2 मिलियन टन से घटकर 2.47 मिलियन टन रह गई.

खपत में आई तेज गिरावट

वित्त वर्ष 2026 में 6 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 33.2 मिलियन टन तक पहुंचने के बाद, भारत में LPG की खपत मार्च और अप्रैल दोनों महीनों में सालदरसाल 13 प्रतिशत घटी, और मई में इसमें 20 प्रतिशत की गिरावट आई. इस गिरावट का सबसे ज़्यादा असर कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूज़र्स पर पड़ा. घरेलू मांग की तुलना में इनकी खपत में ज्यादा तेजी से कमी आई क्योंकि बाजार से जुड़े ग्राहकों ने बढ़ी हुई कीमतों और सप्लाई की दिक्कतों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी. क्रिसिल ने कहा कि संघर्ष के कारण ग्लोबल LPG कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई. सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस फरवरी और जून के बीच 46 प्रतिशत बढ़ गया. इसका बड़ा सप्लाई से जुड़े जोखिमों और ज्यादा फ्रेट कॉस्ट था.

घरेलू और कमर्शियल एलपीजी में इजाफा

कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का कुछ ही हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं पर डाला गया. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत फरवरी और जून के बीच लगभग 10 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 79 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू कुकिंग गैस की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए ‘अंडररिकवरी’ में भारी उछाल आया. इसका कारण खरीद की कॉस्ट रिटेल कीमतों से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ी. दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर पर अंडररिकवरी मई में 651 रुपए प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई, जबकि मार्चमई के दौरान फ्यूल रिटेलर्स को कुल मिलाकर लगभग 22,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

कीमतों में जल्द आ सकती है कमी

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और मुख्य ट्रेड रूट्स के फिर से खुलने की संभावना से सप्लाई को लेकर तत्काल चिंताएं कम होने और ग्लोबल LPG कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है. हालांकि, इस रुकावट ने आयातित LPG पर भारत की लगातार निर्भरता और सीमित स्रोतों से खरीद से जुड़े जोखिमों को उजागर किया. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि हालांकि अलगअलग स्रोतों से खरीद और घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी ने इस असर को कम करने में मदद की, लेकिन यह सेक्टर जियोपॉलिटिकल उथलपुथल, फ्रेट मार्केट में उतारचढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बदलाव के प्रति संवेदनशील बना हुआ है.

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