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इधर 7 महीने से नियुक्ति पत्र के लिए चक्कर काट रहे डॉक्टर…उधर योगी सरकार ने निकाली 1200 नई भर्ती

Up Medical College Recruitment 2026 Vacancies On 1200 Professors And Lecturers Post

UP News: उत्तर प्रदेश में होम्योपैथी विभाग के चयनित 68 चिकित्सकों का नियुक्ति पत्र अटका हुआ है, जबकि राज्य सरकार नए साल में मेडिकल क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। पहले, होम्योपैथी विभाग में मेडिकल ऑफिसर के 53 और रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर के 15 पदों के लिए लगभग दो साल पहले भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। मई 2025 में अंतिम परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, लेकिन सात महीने बीतने के बावजूद चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र नहीं मिला है।

ये चिकित्सक विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि उनकी नियुक्ति कब होगी। होम्योपैथी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन कार्य चल रहा है, जबकि चयनित अभ्यर्थी शिकायत कर रहे हैं कि उन्होंने अन्य अस्पतालों में काम छोड़ दिया था और अब वे कई महीनों से घर बैठे हैं।

मेडिकल कॉलेजों में करीब 1200 पदों पर भर्ती

दूसरी ओर, राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार मेडिकल क्षेत्र में नई भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत करने जा रही है। उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 1200 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन भर्तियों में टीचिंग और टेक्निकल कैटेगरी के पद शामिल होंगे, जिससे प्रदेश की मेडिकल शिक्षा और अस्पतालों की सेवाओं में सुधार होगा।

इसमें 1112 असिस्टेंट प्रोफेसर, 44 प्रोफेसर और 11 फार्मेसी लेक्चरर के पद होंगे। उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) जल्द ही इन पदों के लिए विज्ञापन जारी करेगा और अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

UPPSC जल्द जारी करेगा मेडिकल पदों के लिए विज्ञापन

उत्तर प्रदेश के मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, अमित कुमार घोष ने जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मेडिकल पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया है। इन पदों से जुड़ा प्रस्ताव उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (UPPSC) को भेजा जा चुका है, और उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग जल्द ही इसका ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करेगा। इसके बाद अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

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पढ़ाई के साथ रिसर्च और ट्रेनिंग पर भी होगा फोकस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट किया है कि मेडिकल एजुकेशन केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसमें रिसर्च, क्वालिटी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए। नए प्रोफेसर और लेक्चरर के पदों पर नियुक्तियां होने से छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा और अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

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