नई दिल्ली। मोदी सरकार में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया है, जिसके चलते उन्होंने मंत्रिपरिषद छोड़ दिया है. राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुरियन का इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है.

बीजेपी ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में जॉर्ज कुरियन को फिर से मौका नहीं दिया. यही वजह है कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक मामलों के साथसाथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री का पद भी संभाल रहे थे.
जॉर्ज कुरियन केरल से आते हैं और केंद्र की मोदी सरकार में अकेले ऐसे मंत्री थे जो ईसाई समुदाय से थे. कुरियन का राज्यसभा का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो गया. इसीलिए उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला लिया और कार्यकाल खत्म होने के दूसरे ही दिन मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल खत्म हो गया है. कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे तो रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा सदस्य थे. बीजेपी ने अपने इन दोनों नेताओं को राज्यसभा का अतरिक्त कार्यकाल नहीं दिया, जिसके चलते जॉर्ज कुरियन ने मंत्री से इस्तीफा दे दिया है जबकि रवनीत बिट्टू अभी बने हुए हैं.
1960 में केरल के कोट्टायम में जन्मे कुरियन सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं. 1980 में पार्टी बनने के बाद से बीजेपी के कार्यकर्ता रहे हैं, और उन्होंने पहले नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज के वाइसचेयरमैन के तौर पर काम किया और उसके बाद मोदी सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था.



