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सेबी के नए नियम: अब सेलिब्रिटी कर सकेंगे म्यूचुअल फंड और ब्रोकर कंपनियों का प्रचार, लेकिन स्कीम बताने की मनाही|

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने वित्तीय विज्ञापन नियमों में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। इस नए ‘कॉमन एडवरटाइजमेंट कोड’ के तहत, अब स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और पोर्टफोलियो मैनेजर जैसी वित्तीय संस्थाएं अपने ब्रांड के प्रचार के लिए मशहूर हस्तियों की मदद ले सकेंगी। यह कदम बाजार में पारदर्शिता लाने और निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखते हुए व्यापार में सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सेबी के नए नियम: अब सेलिब्रिटी कर सकेंगे म्यूचुअल फंड और ब्रोकर कंपनियों का प्रचार, लेकिन स्कीम बताने की मनाही|

ब्रांड लेवल पर ही एंडोर्समेंट की अनुमति

सेबी के प्रस्तावित नियमों के अनुसार, सेलिब्रिटी केवल कंपनी या ब्रांड लेवल पर ही एंडोर्समेंट कर पाएंगे। इसका अर्थ यह है कि वे किसी विशेष म्यूचुअल फंड स्कीम, शेयर, या अन्य किसी वित्तीय उत्पाद का सीधे प्रचार नहीं कर सकेंगे। सेबी का मानना है कि इस प्रतिबंध से निवेशक किसी खास उत्पाद में निवेश करने के लिए भ्रामक प्रभाव में नहीं आएंगे। वर्तमान में, केवल म्यूचुअल फंड कंपनियों को ही इंडस्ट्री लेवल पर प्रचार की अनुमति है, जिसके लिए उन्हें पहले सेबी से पूर्व मंजूरी लेनी पड़ती है।

मंजूरी की प्रक्रिया हुई आसान

नए प्रस्तावों के अंतर्गत, स्टॉक ब्रोकर, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट को विज्ञापन जारी करने से पहले सेबी से अग्रिम मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य होगा कि विज्ञापन प्रकाशित होने के 24 घंटे के भीतर इसकी जानकारी संबंधित स्टॉक एक्सचेंज या सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था को दी जाए। इससे कंपनियों की कागजी कार्रवाई कम होगी और विज्ञापनों का तेजी से प्रसार हो सकेगा।

रेटिंग और छोटे विज्ञापनों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस

सेबी ने विज्ञापनों में रेटिंग या रैंकिंग के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। अब कंपनियां केवल उन्हीं रेटिंग का उपयोग कर सकेंगी, जो किसी मान्यता प्राप्त ‘पास्ट रिस्क एंड रिटर्न वेरिफिकेशन एजेंसी’ द्वारा जारी की गई हों। इसके अलावा, विज्ञापन में यह स्पष्ट करना अनिवार्य होगा कि निवेश का निर्णय लेने के लिए केवल रेटिंग ही एकमात्र आधार नहीं है। एसएमएस, पॉपअप और नोटिफिकेशन जैसे छोटे विज्ञापनों के लिए नियमों को सरल बनाया गया है, जहां पूरी चेतावनी लिखने के बजाय एक लिंक देना पर्याप्त होगा, जिससे निवेशक विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकें।

यह प्रस्ताव न केवल वित्तीय क्षेत्र में विज्ञापनों के मानकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भ्रामक विज्ञापनों पर लगाम लगाने और निवेशकों को जागरूक करने के लिए भी प्रभावी साबित होगा। सेबी ने इन नियमों पर जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

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