
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। रावलकोट में लोगों का गुस्सा अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। जॉइंट पब्लिक एक्शन कमेटी (JPAC) के नेतृत्व में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और पाकिस्तान सरकार व फौज के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें बुनियादी सुविधाएँ, रोजगार, बिजली और आर्थिक अधिकार नहीं मिल रहे हैं जबकि उनकी आवाज उठाने पर बल प्रयोग किया जा रहा है। यहाँ तक कि पाकिस्तानी फौज ने मरे हुए कश्मीरी नौजवानों की लाशों को भी किडनैप करना शुरू कर दिया
प्रदर्शनकारियों ने फौज पर लगाए गंभीर आरोप
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन में शामिल लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चला रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि कई लोगों की मौत हुई है और मृतकों के शवों को भी सेना अपने कब्जे में ले रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि घटनाओं की पूरी जानकारी दुनिया के सामने न आ सके।
साद अंसारी ने सरकार और सेना को दी चेतावनी
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल एडवोकेट साद अंसारी ने रावलकोट में आयोजित एक बड़े धरने को संबोधित करते हुए कहा कि अब लोग अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने हजारों प्रदर्शनकारियों से पूछा कि क्या वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं, जिस पर भीड़ ने समर्थन में जवाब दिया। अंसारी ने कहा कि कश्मीरी जनता अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
साद अंसारी ने स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक नेताओं की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनता टैक्स देती है लेकिन बदले में उसे सुविधाएँ नहीं मिलतीं। उनके अनुसार आम लोग आर्थिक संकट और महँगाई से जूझ रहे हैं जबकि अधिकारी और नेता अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने में असफल रहे हैं।
बैंकिंग सुधार और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगों में स्थानीय बैंकिंग व्यवस्था में सुधार शामिल है। उन्होंने माँग की है कि AJK बैंक को पूर्ण शेड्यूल्ड बैंक का दर्जा दिया जाए ताकि लोगों को बेहतर वित्तीय सुविधाएँ मिल सकें।
इसके अलावा आंदोलनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से PoK की स्थिति पर ध्यान देने और वहाँ पहुँचकर हालात का जायजा लेने की अपील भी की है। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और आरोपों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।



