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वक्फ अधिनियम के जरिए मुस्लिम संस्थानों को कमजोर कर रहे भाजपा और उसके सहयोगी : असदुद्दीन ओवैसी

छत्रपति संभाजीनगर। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों पर वक्फ अधिनियम के जरिए मुस्लिम धार्मिक संस्थानों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोमवार शाम नांदेड़ में एक रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि हाल में पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम का इस्तेमाल मस्जिदों में “तालाबंद” करने और सदियों पुरानी दरगाहों के स्वामित्व को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का उद्देश्य इन धार्मिक स्थलों का नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सौंपना है। उन्होंने मतदाताओं से 15 जनवरी को होने वाले नांदेड़-वाघाला नगर निगम चुनावों में भाजपा, अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को वोट न देने की अपील की।

नांदेड़ नगर निकाय चुनाव में ओवैसी पार्टी ने उतारे 37 उम्मीदवार

ओवैसी ने कहा कि मुसलमान “न तो किरायेदार हैं और न ही दोयम दर्जे के नागरिक” और भारत उनका भी देश है। एआईएमआईएम ने 81 सीटों वाले नांदेड़ नगर निकाय चुनाव के लिए 37 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। ओवैसी ने कहा, “राज्य और देश में वक्फ बोर्ड को खत्म करने की कोशिश करने वालों को कड़ा संदेश देने के लिए लोगों को इन पार्टियों के खिलाफ वोट देना चाहिए।” उन्होंने कहा, “वक्फ अधिनियम के जरिए सरकार का इरादा मस्जिदों पर ताला लगाना है और यह दिखाना है कि 100 साल से अधिक पुरानी दरगाहें वक्फ की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि एएसआई की हैं।

यह चुनाव वक्फ (संशोधन) अधिनियम के लागू होने के बाद हो रहा है। लोगों को शिंदे, पवार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह संदेश देना चाहिए कि हम इस कानून को स्वीकार नहीं करते।” उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जाएगा और यदि लोग चाहते हैं कि उनका नाम मतदाता सूची में बना रहे, तो उन्हें इस चुनाव में मतदान करना चाहिए।

भाजपा सांसद अशोक चव्हाण पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें केंद्र में मंत्री तक नहीं बनाया। ओवैसी ने दावा किया कि उन्हें इस तरह दरकिनार किया गया है जैसे मानों “चाय से मक्खी को निकाल कर’’ फेंक दिया हो। मुंबई में 11 जुलाई 2006 को हुए सिलसिलेवार ट्रेन धमाकों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि इस घटना में 185 लोगों की मौत हुई थी और 11 मुस्लिम पुरुषों को 19 साल तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘(ट्रेन धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार किये गए) कमाल अंसारी की 2021 में कोविड के दौरान जेल में मौत हो गई और न तो पीड़ितों को, न ही आरोपियों को न्याय मिला। क्या उस समय एआईएमआईएम या कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री था? लोगों को इस बारे में कांग्रेस से सवाल करना चाहिए।’’ जुलाई 2024 में मुंबई उच्च न्यायालय ने 2006 के सिलसिलेवार ट्रेन धमाकों के मामले में गिरफ्तार 12 लोगों को बरी कर दिया था।

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