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‘पति की प्रॉपर्टी नहीं है पत्नी’, ओडिशा HC ने ये कहकर खारिज की याचिका, 50,000 का लगाया जुर्माना

नई दिल्ली वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी को पति की संपत्ति नहीं माना जा सकता और वह अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। अदालत ने यह भी कहा कि हेबियस कॉर्पस याचिका का इस्तेमाल निजी या वैवाहिक विवाद सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता।

‘पति की प्रॉपर्टी नहीं है पत्नी’, ओडिशा HC ने ये कहकर खारिज की याचिका, 50,000 का लगाया जुर्माना

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस एम.एस. रमण की खंडपीठ ने एक पति द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका को खारिज करते हुए उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

दरअसल, पति ने अदालत से अपनी पत्नी का पता लगाने और उसे वापस घर भेजने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि पतिपत्नी के बीच लंबे समय से वैवाहिक मतभेद और पारिवारिक विवाद चल रहा था, जिसके चलते पत्नी अपनी इच्छा से घर छोड़कर चली गई थी। कोर्ट ने कहा कि संबंधित महिला बालिग है और अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने का पूरा अधिकार रखती है। यदि वह अपनी इच्छा से पति से अलग रहना चाहती है, तो अदालत उसे जबरन पति के साथ रहने या उसके घर लौटने का आदेश नहीं दे सकती।

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि हेबियस कॉर्पस जैसी संवैधानिक व्यवस्था का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अवैध हिरासत से मुक्त कराना है, न कि वैवाहिक विवादों या व्यक्तिगत स्वार्थों को पूरा करना। ऐसे मामलों में इस कानूनी प्रावधान का दुरुपयोग न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालता है। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता उचित उद्देश्य के बजाय निजी हित साधने के लिए कोर्ट पहुंचा था। इसी कारण उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि दो सप्ताह के भीतर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाए। आदेश के अनुसार, इस धनराशि का उपयोग बाल कल्याण और किशोर न्याय से जुड़े कार्यक्रमों में किया जाएगा।

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