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प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती… इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन बताया

इलाहाबाद हाई कोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने कहा कि प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. हालांकि कोर्ट ने अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है. जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच में शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं.

प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती… इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन बताया

कोर्ट ने कहा कि प्रशासक नियुक्त करना डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है, जो अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर के रूप में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया.

13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार ने कोई आयोग गठित किया है, तो उसकी जानकारी और अन्य विवरण कोर्ट में दाखिल करें, जिसमें चुनाव होने की समय सीमा स्पष्ट रूप से बताई गई हो प्रस्तुत करें. याचिकाकर्ता अरविंद राठौर की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, 13 जुलाई को दोपहर 2:00 बजे मामले की अगली सुनवाई होगी.

यूपी में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया है. सरकार ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया है. याचिका में प्रशासकों हटाकर त्रिस्तरी पंचायत चुनाव कराए जाने की मांग की गई है.

फिलहाल खबर अपडेट की जा रही है.

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