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शेयर बाजार में भारी गिरावट के बाद लौटी उम्मीद, एक्सपर्ट्स ने बताया पैसे लगाने का सही समय

पिछले कई महीनों से भारतीय शेयर बाजार में जारी सुस्ती और गिरावट से परेशान निवेशकों के लिए एक राहत भरी खबर आ रही है. अगर आप भी अपने पोर्टफोलियो में लाल निशान देखकर चिंतित थे, तो घरेलू ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की ताजा स्ट्रेटजी रिपोर्ट आपके लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2024 से बाजार पर दबाव बनाने वाले लगभग सभी निगेटिव फैक्टर्स अब धीरेधीरे खत्म हो रहे हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी आंकड़े , शेयरों की कीमतों का वाजिब स्तर पर आना और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमना इस बात का संकेत है कि शेयर बाजार अब एक बार फिर रफ्तार पकड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है.

शेयर बाजार में भारी गिरावट के बाद लौटी उम्मीद, एक्सपर्ट्स ने बताया पैसे लगाने का सही समय

महंगे शेयरों की कीमतों में बड़ी कटौती

इस साल की शुरुआत से अब तक भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स में करीब 9% की गिरावट आ चुकी है. इतना ही नहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 24 जून 2026 तक बाजार से नेट ₹2.73 लाख करोड़ की भारीभरकम रकम निकाल ली. इस बड़ी गिरावट ने भले ही आम निवेशकों को डराया हो, लेकिन आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का मानना है कि इस करेक्शन ने बाजार को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक बना दिया है.

बाजार जब अपने ऊंचे स्तर पर था, तब इसका वैल्यूएशन 24 गुना तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 18 गुना के बेहद वाजिब स्तर पर आ चुका है. इसका सीधा मतलब यह है कि जो शेयर पहले बहुत महंगे थे, वे अब सही दाम पर मिल रहे हैं. ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, अब बाजार में तेजी आने के लिए किसी बाहरी चमत्कार की जरूरत नहीं है, बल्कि कंपनियों के मुनाफे में होने वाली 1415% की संभावित ग्रोथ सीधे तौर पर शेयरों की कीमतों को ऊपर ले जाएगी.

दुनिया भर में एआई शेयरों का गुब्बारा फूटा

पिछले कुछ समय से दुनिया भर के निवेशक भारतीय बाजार को छोड़कर ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में पैसा लगा रहे थे. नैस्डैक की बड़ी टेक कंपनियों से लेकर कोरियाई एआई कंपनियों के शेयरों में आई इस दीवानगी के कारण भारतीय बाजार से फंड्स बाहर जा रहे थे.

अब वैश्विक स्तर पर एआई का यह उत्साह ठंडा पड़ता दिख रहा है. बड़ी एआई कंपनियों के शेयरों में उतारचढ़ाव बढ़ गया है, स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के आईपीओ के बाद कीमतों में रिवर्सल देखा गया है, और कर्ज बढ़ने व कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण निवेशकों का डर सामने आने लगा है. हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे हाइपरस्केलर्स की मजबूत बैलेंस शीट के कारण दुनिया भर के बाजारों में किसी बड़े क्रैश का खतरा तो नहीं है, लेकिन एआई का क्रेज कम होने से अब विदेशी फंड्स का रुख दोबारा भारत जैसे उभरते बाजारों की तरफ होना तय माना जा रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से आ रहे ताजा आंकड़े आम निवेशकों के भरोसे को और मजबूत करते हैं. वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन यानी देश में हो रहे निवेश का रहा है. इसके साथ ही देश का करंट अकाउंट भी सरप्लस यानी मुनाफे की स्थिति में आ गया है, जिसे मजबूत सर्विसेज एक्सपोर्ट और विदेशों से आने वाले पैसे से सहारा मिला है.

आर्थिक इंडिकेटरवर्तमान स्थितिबाजार पर इसका सीधा असर
क्रूड ऑयल$80 प्रति बैरल से नीचेभारत का आयात बिल घटेगा, निफ्टी 50 में तेजी की संभावना
भारतीय रुपयाडॉलर के मुकाबले 95 से नीचेरुपये में मजबूती से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा
10 साल का बॉन्ड यील्ड6.9% से नीचेकंपनियों के लिए कर्ज की लागत कम होगी

कच्चे तेल का सस्ता होना भारतीय बाजार के लिए हमेशा से संजीवनी जैसा रहा है, क्योंकि दोनों के बीच उल्टा संबंध होता है. तेल सस्ता होने से देश का खर्च घटेगा और कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा. रिजर्व बैंक के नए कदमों से घरेलू डेट मार्केट में भी विदेशी फंड्स का आना आसान हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों की चौतरफा बिकवाली अब थमने लगी है.

इन बातों का रखना होगा ध्यान

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की यह रिपोर्ट साफ करती है कि बाजार का संतुलन अब तेजी के पक्ष में झुक रहा है, लेकिन निवेशकों को पूरी तरह बेफिक्र भी नहीं होना चाहिए. रिपोर्ट में कुछ ऐसे जोखिमों का भी जिक्र किया गया है जिन पर नजर रखना बेहद जरूरी है.

साल 2026 में अल नीनो मौसम के सक्रिय होने की आशंका बनी हुई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल के अंत में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता. यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक स्तर पर फंड्स की आवाजाही प्रभावित हो सकती है. इन चुनिंदा रिस्क फैक्टर्स के बावजूद, निवेशकों के लिए यह बाजार में धीरेधीरे अच्छी कंपनियों के शेयर जोड़कर लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन शुरू करने का एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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