
जम्मू-कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में स्थित गुलमर्ग के फॉरवर्ड एरिया (अग्रिम क्षेत्र) में आशा पोस्ट के पास अचानक एक शक्तिशाली विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में एक स्थानीय नागरिक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। धमाके की गूंज से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह ब्लास्ट बीते वर्ष भारतीय सेना द्वारा चलाए गए एक बड़े सैन्य अभियान के पुराने शेल के फटने के कारण हुआ है।
ऑपरेशन सिंदूर का लावारिस शेल अचानक फटा, इलाके में मची अफरा-तफरी
रक्षा सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट किसी नए आतंकी हमले का हिस्सा नहीं है। बताया जा रहा है कि आशा पोस्ट के पास जो शेल फटा, वह कथित तौर पर पिछले साल भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उसी इलाके में गिरा रह गया था। शनिवार को अचानक इस लावारिस शेल में ब्लास्ट हो गया। विस्फोट इतना जोरदार था कि इसकी चपेट में आने से वहां मौजूद नागरिक हताहत हो गए। धमाके के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और मुस्तैद जवानों ने मिलकर घायलों को नजदीकी सैन्य और नागरिक अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
सेना और पुलिस ने पूरे फॉरवर्ड एरिया को घेरा, सर्च ऑपरेशन जारी
हालांकि, इस दुखद घटना को लेकर अभी तक सेना या जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। एहतियात के तौर पर सुरक्षाबलों ने आशा पोस्ट और उसके आस-पास के पूरे फॉरवर्ड एरिया को सील कर दिया है। बम निरोधक दस्ते (BDS) को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इलाके में इस तरह का कोई दूसरा जिंदा शेल या विस्फोटक सामग्री मौजूद न हो।
पहलगाम नरसंहार का बदला था ‘ऑपरेशन सिंदूर’, दहल उठा था पाकिस्तान
इस घटना ने एक बार फिर पिछले साल के उस ऐतिहासिक सैन्य अभियान की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की कमर तोड़ दी थी। गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने कायराना हरकत करते हुए अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें 25 बेकसूर पर्यटकों और एक स्थानीय पोनीवाले समेत 26 लोगों की मौत हो गई थी।
इस क्रूरता का कड़ा प्रतिशोध लेने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई 2025 की सुबह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का शंखनाद किया था। भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने सीमा पार (एलओसी) जाकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाक के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में घुसकर आतंकियों के लॉन्च पैड्स को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था, जिसमें 100 से अधिक खूंखार आतंकी ढेर हुए थे।
3 दिनों तक चले संघर्ष में पाकिस्तान ने टेके थे घुटने
इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सीमा पर तीन दिनों तक भीषण गोलाबारी और संघर्ष चला था। भारतीय सेना के प्रचंड प्रहार के आगे टिक न पाने के कारण पाकिस्तान को भारी सैन्य और ढांचागत नुकसान उठाना पड़ा था, जिसमें उसके कई सैन्य ठिकाने और रनवे तबाह हो गए थे।
बौखलाए पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने अंततः भारत के सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) से हॉटलाइन पर संपर्क कर हमला रोकने की भीख मांगी थी। पाकिस्तान के इसी लिखित अनुरोध और गुहार पर भारत ने 10 मई 2025 को अपना अभियान रोक दिया था। हालांकि, भारत ने तब भी साफ लहजे में चेतावनी दी थी कि यह ऑपरेशन सिर्फ स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं; और सीमा पार से दोबारा कोई हिमाकत हुई तो अंजाम इससे भी भयानक होगा।


