वेदांता ग्रुप ने रेयर अर्थ मेटल्स पर अपने प्लान को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. ग्रुप ने अगले पांच सालों में देश को 3 नए ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ देने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के CEO अरुण मिश्रा ने कंपनी की 60वीं सालाना आम बैठक में कहा कि कंपनी अगले पांच सालों में अपने पोर्टफोलियो में कम से कम तीन नए मेटल्स शामिल करने की योजना बना रही है.

इसका मकसद सिर्फ जिंक निकालने वाली कंपनी से बदलकर अलगअलग तरह के जरूरी मिनरल्स वाली कंपनी बनना है. वेदांता ग्रुप की इस कंपनी ने, जो भारत में जिंक और सिल्वर की सबसे बड़ी उत्पादक है, कहा कि उसकी लंबी अवधि की रणनीति जिंक, लेड, सिल्वर और कैडमियम के मौजूदा पोर्टफोलियो से आगे बढ़कर रेयर अर्थ , पोटाश और टंगस्टन जैसे बिजनेस में उतरने की है.
मिश्रा ने शेयरधारकों से कहा कि हमारी रणनीतिक सोच के मुताबिक, अगले पांच सालों में हमें अपने पोर्टफोलियो में लगभग तीन और नए मेटल्स धातुएं शामिल करनी होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सही मिनरल ब्लॉक मिलते हैं, तो कंपनी कॉपर या गोल्ड के क्षेत्र में भी मौके तलाश सकती है. यह कंपनी के CEO के तौर पर मिश्रा की आखिरी AGM थी. वे अगले दो महीनों में वेदांता लिमिटेड के ग्रुप CEO बनने वाले हैं. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अमरेंदु प्रकाश को कंपनी का CEOडेजिग्नेट चुना गया है.
डायवर्सिफिकेशन की कोशिश
केंद्र सरकार के ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत होने वाली नीलामी में हिंदुस्तान जिंक की ज़ोरदार भागीदारी उसके डायवर्सिफिकेशन की कोशिश को दिखाती है. CEO ने कहा कि कंपनी ने टंगस्टन, पोटाश और रेयरअर्थ एलिमेंट्स के लिए मिनरल ब्लॉक हासिल कर लिए हैं. यह कदम देश के औद्योगिक और ऊर्जा बदलाव के लिए जरूरी माने जाने वाले मिनरल्स के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाने के मकसद के अनुरूप है.
मैनेजमेंट ने हर मिनरल की रणनीतिक अहमियत पर जोर दिया. मिश्रा ने कहा कि अगर हम राजस्थान में मिले ब्लॉक में पोटाश की मौजूदगी साबित करने में सफल हो जाते हैं, तो हम पोटाश की माइनिंग करने वाली पहली कंपनी होंगे. और चूंकि हम फर्टिलाइजर बिजनेस में जा रहे हैं, इसलिए यह हमारे लिए एक बेहतरीन तालमेल होगा. टंगस्टन एक ऐसी धातु है जिसकी इंडस्ट्री में बहुत ज्यादा जरूरत है, और भारत में इसकी माइनिंग करने वाली हम पहली कंपनी होंगे.
कंपनी उत्तर प्रदेश में जीते गए रेयरअर्थ ब्लॉक में भी काफी संभावनाएं देख रही है. मिश्रा के मुताबिक, इस ब्लॉक से नियोडिमियम का उत्पादन हो सकता है. यह एक अहम मटीरियल है जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य क्लीनएनर्जी टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी परमानेंट मैग्नेट बनाने में होता है.कंपनी सरकार की मैग्नेट बनाने वाली नीलामी में भी हिस्सा लेने का इरादा रखती है, जिससे वह वैल्यू चेन में और आगे बढ़ सकेगी. मिश्रा ने शेयरधारकों से कहा कि हिंदुस्तान जिंक भारत में मैग्नेट बनाने के लिए सरकार की नीलामी में भी हिस्सा लेगा क्योंकि यही भविष्य है.
क्या है कंपनी का मेगा प्लान?
इन निवेशों का मकसद हिंदुस्तान जिंक को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों के लिए ज़रूरी मिनरल्स का मुख्य सप्लायर बनाना है. कंपनी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान जिंक ने कई जरूरी मिनरल ब्लॉक हासिल किए हैं, जिनमें बालेपालयम में टंगस्टन ब्लॉक, नवाटोला, लबंद में रेयरअर्थ एलिमेंट्स ब्लॉक और झांडावाली, सतीपुरा में पोटाश ब्लॉक शामिल हैं.
मिश्रा ने बताया कि यह डायवर्सिफिकेशन उसके 40,00045,000 करोड़ रुपए के एक्सपेंशन प्रोग्राम के साथ हो रहा है, जिसका मकसद सालाना मेटल प्रोडक्शन को दोगुना करके 2 मिलियन टन करना है. उन्होंने कहा कि कंपनी के पास क्षमता बढ़ाने और नए मिनरल्स के क्षेत्र में उतरने, दोनों के लिए फंड जुटाने की आर्थिक ताकत है, साथ ही वह शेयरधारकों को रिटर्न भी देती रहेगी.
AGM के दौरान, शेयरधारकों ने मैनेजमेंट से रेयरअर्थ डायवर्सिफिकेशन के फायदों और अगले पांच सालों में ग्रोथ के मुख्य कारणों के बारे में सवाल पूछे. साथ ही, उन्होंने कंपनी से अपनी 60वीं AGM के मौके पर बोनस शेयर जारी करने पर विचार करने का आग्रह किया. हिंदुस्तान जिंक ने वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू में लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 40,844 करोड़ रुपए की कमाई दर्ज, जबकि मुनाफा 34 फीसदी बढ़कर 13,832 करोड़ रुपए हो गया. वेदांता लिमिटेड के पास हिंदुस्तान जिंक की 60.71 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि केंद्र सरकार के पास 27.92 फीसदी और बाकी 11.37 फीसदी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरधारकों के पास है.



