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ब्लड शुगर बढ़ना और डायबिटीज होना, दोनों में कितना फर्क? डॉक्टर ने किया खुलासा…

ब्लड शुगर बढ़ना और डायबिटीज होना, दोनों में कितना फर्क? डॉक्टर ने किया खुलासा…

अक्सर लोग ब्लड शुगर बढ़ जाना और डायबिटीज होना दोनों को एक ही समझ लेते हैं,  लेकिन क्या वाकई इन दोनों में कोई अंतर नहीं है? मेडिकल साइंस के नजरिए से दोनों में एक बहुत ही बारीक और महत्वपूर्ण रेखा है, जिसे समझना आपकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है । जब भी हम रूटीन हेल्थ चेकअप कराते हैं, तो सबसे पहला शब्द जो सामने आता है, वह है ब्लड शुगर। कई बार लोग शुगर लेवल थोड़ा सा ऊपर-नीचे होते ही घबरा जाते हैं और उसे डायबिटीज समझ बैठते हैं। डायबिटीज और मोटापा के एक्सपर्ट डॉ. राजीव कोविल के अनुसार, ब्लड शुगर यानी ग्लूकोज वह शर्करा है जो किसी भी समय हमारे ब्लड में मौजूद रहता है। ग्लूकोज शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और यह हमें खाने से मिलता है। खाना खाने के बाद ब्लड शुगर का स्तर बढ़ना और कुछ समय बाद सामान्य होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जिन लोगों की बॉडी हेल्दी रहती है उनके शरीर में भी ब्लड शुगर मौजूद होता है।

ब्लड शुगर शरीर में मौजूद ग्लूकोज की मात्रा को दर्शाता है, जबकि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर ब्लड शुगर को सही तरीके से कंट्रोल नहीं कर पाता। कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट एवं डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव घोडी बताते हैं कि दिनभर में भोजन, शारीरिक गतिविधि, तनाव, नींद और दूसरे कारणों से ब्लड शुगर का स्तर बदलता रहता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डायबिटीज क्या है?  ब्लड शुगर और  डायबिटीज में क्या अंतर है।

डायबिटीज क्या है?

डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन करना कम या बंद कर देता है या फिर दोनों समस्याएं एक साथ मौजूद होती हैं। हमारी बॉडी ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर बनाए रखने में असफल होती है तो ये स्थिति डायबिटीज कहलाती है।

क्या एक बार ब्लड शुगर बढ़ने का मतलब डायबिटीज है?

डॉ. घोडी के अनुसार, किसी बीमारी, तनाव, पर्याप्त नींद न लेने, कुछ दवाओं के सेवन या बहुत अधिक भोजन करने के कारण भी ब्लड शुगर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। लेकिन केवल एक बार ब्लड शुगर बढ़ जाना डायबिटीज होने का प्रमाण नहीं होता।

एक बार ब्लड टेस्ट करने से क्या डायबिटीज की पुष्टि होती है?

  • एक्सपर्ट के मुताबिक किसी को भी डायबिटीज है तो इसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर कई तरह के टेस्ट कराते हैं जैसे
  • फास्टिंग ब्लड शुगर (Fasting Blood Sugar)
  • HbA1c टेस्ट जो पिछले तीन महीनों की ब्लड शुगर का ब्योरा देता है।
  • ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (Oral Glucose Tolerance Test)की रिपोर्ट की मदद से डॉक्टर किसी भी इंसान के डायबिटीज और नॉन डायबिटीज होने की पुष्टि करता है।

ब्लड शुगर और डायबिटीज में आसान अंतर

ब्लड शुगर शरीर में मौजूद ग्लूकोज का एक माप (Measurement) है। जबकि डायबिटीज एक बीमारी है, जिसमें ब्लड शुगर लंबे समय तक असामान्य रूप से बढ़ा रहता है।
हर इंसान के शरीर में ब्लड शुगर होता है, लेकिन लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर डायबिटीज का संकेत हो सकता है। मापदंड (Criteria)ब्लड शुगर (Blood Sugar)डायबिटीज (Diabetes)यह क्या है?शरीर में मौजूद ग्लूकोज (ऊर्जा का स्रोत) का एक माप है।एक क्रॉनिक बीमारी है, जहां शरीर शुगर को कंट्रोल नहीं कर पाता।स्थितियह हर स्वस्थ इंसान के शरीर में सामान्य रूप से होता है।यह केवल तब होता है जब ब्लड शुगर लंबे समय तक असामान्य रूप से बढ़ा रहे।स्वभावभोजन, तनाव या नींद के कारण यह दिनभर बदलता रहता है।यह इंसुलिन की कमी या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होने वाली स्थायी स्थिति है।

डायबिटीज से बचाव कैसे करें?

  • एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपको डायबिटीज से बचाव करना है तो अपने लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करें। तनाव को कंट्रोल करें। बॉडी की एक्टिविटी इस बीमारी से बचाव में बेहद मददगार साबित होती है।
  • डायबिटीज से बचाव के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • वजन को कंट्रोल रखें।

समय पर जांच है जरूरी

एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज से पहले की स्थिति प्रीडायबिटीज होती है। अगर समय रहते ब्लड शुगर टेस्ट HbA1c साल में एक बार कराया जाए तो इस बीमारी का शुरूआत में ही पता लगाया जा सकता है। अगर प्रीडायबिटीज की स्थिति में ही सतर्क हो जाएंगे तो आप लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके आप प्री डायबिटीज को रिवर्स कर सकते हैं और डायबिटीज की स्थिति से बच सकते हैं। इसलिए समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी है। यदि शुरुआती स्थिति में ब्लड शुगर के स्तर का पता चल जाए तो हृदय, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख विशेषज्ञों की राय और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या उपचार शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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