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Bharat Tiwari Encounter Case Update: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, भरत तिवारी की आज तेरहवीं में 25 हजार लोगों के लिए बनेगा खाना

Bharat Tiwari Encounter Case Update: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले 26 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को एनकाउंटर के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद से बिहार की राजनीति, पुलिस की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां आज इस मामले में सुनवाई होनी है। वहीं आज भरत तिवारी की तेरहवीं है। कम से कम 25 हजार लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया गया है। 

Bharat Tiwari Encounter Case Update: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, भरत तिवारी की आज तेरहवीं में 25 हजार लोगों के लिए बनेगा खाना

क्या है पूरा मामला?

17 जून को भोजपुर पुलिस ने दावा किया कि शाहपुर थाना क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, आत्मरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें भरत के पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

हालांकि, भरत के परिवार और बिलौटी गांव के ग्रामीणों ने पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया। उनका आरोप है कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि फर्जी एनकाउंटर था। परिवार शुरू से ही पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करता रहा है।

पुलिस के दावे पर उठे सवाल

घटना के बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी एनकाउंटर को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे। विपक्षी दलों ने बिहार सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। वहीं सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की।

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने केवल पुलिस ही नहीं बल्कि सरकार की भूमिका की भी जांच कराने की बात कही।

फॉरेंसिक जांच बनी सबसे अहम कड़ी

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भरत भूषण तिवारी को लगी गोली आखिर किस हथियार से चली थी। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अदालत की अनुमति के बाद एनकाउंटर में इस्तेमाल किए गए तीनों हथियारों और घटनास्थल से बरामद कारतूसों के खोखों को पटना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है।

एफएसएल की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भरत के शरीर में लगी गोली किस हथियार से चली थी और घटनास्थल से मिले साक्ष्य पुलिस के दावे से मेल खाते हैं या नहीं। फिलहाल सभी की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने इस पूरे मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की। उन्होंने खुद याचिकाकर्ता के रूप में अदालत में पैरवी की है। याचिका में केंद्र सरकार, बिहार सरकार, बिहार के पुलिस महानिदेशक और CBI को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में क्या मांग की गई है?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि 

  • भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को फर्जी मानते हुए इसकी CBI जांच कराई जाए।
  • एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए।
  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति करे।
  • संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

याचिका में कहा गया है कि पुलिस किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने या सजा देने वाली संस्था नहीं है। सजा देने का अधिकार केवल अदालत को है और फर्जी एनकाउंटर कानून के शासन के खिलाफ हैं।

पहले तत्काल सुनवाई से किया था इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती चरण में इस मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। अदालत ने याचिकाकर्ता को नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई की तारीख लेने को कहा था। अब आज इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

राष्ट्रपति सचिवालय ने भी लिया संज्ञान

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने 24 जून को राष्ट्रपति के नाम ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी। राष्ट्रपति सचिवालय ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही की गई कार्रवाई की रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है।

आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने मांग की है कि यदि मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच तभी संभव होगी जब जांच पूरी तरह स्वतंत्र एजेंसी के हाथों में हो।

पुलिस अधिकारियों को धमकी देने के आरोप में नया केस

इसी बीच भोजपुर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी दीपक दीक्षित उर्फ पंडित के खिलाफ साइबर थाना में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर पुलिस अधिकारियों को जान से मारने की धमकी दी और लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काने की कोशिश की।

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अब आगे क्या?

अब इस पूरे मामले में तीन बड़ी बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं

1. सुप्रीम कोर्ट आज याचिका पर क्या रुख अपनाता है।

2. क्या अदालत CBI जांच के आदेश देती है या नहीं।

3. एफएसएल रिपोर्ट में गोली और हथियारों को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आता है।

इन तीनों पहलुओं पर आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित मामले की दिशा काफी हद तक तय होगी।

फिलहाल स्थिति

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल एक पुलिस मुठभेड़ का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस कार्रवाई, न्यायिक निगरानी, मानवाधिकार और कानून के शासन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रही है, जबकि दूसरी ओर परिवार, ग्रामीण और कई सामाजिकराजनीतिक पक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिनसे इस मामले की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है

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