अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बावजूद मंदिर के मैनेजमेंट में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है. सूत्रों का कहना है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा पहले की तरह ही मंदिर के मैनेजमेंट में शामिल हैं और अहम फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं. खबर है कि दोनों हमेशा की तरह मंदिर परिसर में आतेजाते रहते हैं.

इस बीच, गोपालजी राव के बारे में भी नई जानकारी सामने आई है. चश्मदीद पंडित विपिन शंकर तिवारी ने दावा किया है कि उन्हें सोमवार को राम मंदिर के गर्भगृह के पास देखा गया था. इस दावे के समर्थन में एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें लाल कुर्ते में एक व्यक्ति दिख रहा है, जिसकी पहचान गोपालजी राव के तौर पर की गई है. पंडित विपिन शंकर तिवारी ने दावा किया है कि उन्होंने खुद गोपालजी राव को मंदिर में देखा था.
जमीनी स्तर पर ट्रस्ट में कोई खास बदलाव नहीं
सूत्रों के मुताबिक, गोपालजी राव की जिम्मेदारियां और उनका प्रभाव बरकरार है. आरोप है कि मंदिर के मैनेजमेंट से जुड़े कई अहम फैसले अभी भी चंपत राय, गोपालजी राव और अनिल मिश्रा की भागीदारी से लिए जा रहे हैं. सूत्रों का यह भी कहना है कि इस्तीफे सिर्फ कागजों पर हैं, जबकि जमीनी स्तर पर ट्रस्ट में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद बढ़ते दबाव के बीच इस्तीफों की चर्चा शुरू हुई थी, लेकिन इसका मैनेजमेंट के ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय अभी अयोध्या में हैं.
ट्रस्ट की बैठक में होगा चंपत और अनिल का फैसला
इन इस्तीफों और इससे जुड़ी घटनाओं पर 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में चर्चा होने की संभावना है. हालांकि, सूत्रों के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है. वहीं, बताया जा रहा है कि अब 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक 6 तारीख को होगी. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा.
कौन हैं गोपालजी राव?
कर्नाटक में प्रांत प्रचारक रहे गोपाल राव वर्तमान में विहिप में केंद्रीय सह मंत्री पद पर हैं. वह गुजरात का भी संगठन का कार्य देख रहे हैं. उन्हें संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देश पर मंदिर निर्माण के समय ही निर्माण प्रभारी के रूप में तैनात किया गया था. बाद में वह व्यवस्थापक के रूप में मंदिर का प्रबंधन देख रहे हैं. उन्हें ट्रस्ट में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भी स्थान दिया गया है.



