मेघालय में चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मेघालय हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सोनम की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद सोनम रघुवंशी हत्या मामले के ट्रायल के दौरान सशर्त जमानत पर बाहर ही रहेगी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है और इससे मामले के गुणदोष या आरोपी की दोषसिद्धि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। हत्या का मुकदमा पहले की तरह जारी रहेगा।

यह फैसला न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत ने अप्रैल 2026 में जिला एवं सत्र न्यायालय, शिलांग द्वारा पारित उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की दस दिनों से अधिक समय तक चली विस्तृत बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 10 जून 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने अपना निर्णय सुना दिया है, हालांकि विस्तृत लिखित आदेश अभी जारी किया जाना बाकी है।
दरअसल, शिलांग की निचली अदालत ने सोनम रघुवंशी को जमानत उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता को कम मानते हुए नहीं, बल्कि प्रक्रिया संबंधी और संवैधानिक आधारों पर प्रदान की थी। अदालत ने अपने आदेश में माना था कि जांच एजेंसियां गिरफ्तारी के समय सोनम को उसकी गिरफ्तारी के आधार और कारणों की विधिसम्मत जानकारी देने में विफल रहीं, जबकि ऐसा करना आपराधिक प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों के तहत आवश्यक है। अदालत ने इसे एक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत चूक माना और इसी आधार पर जमानत मंजूर की थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को निर्दोष घोषित कर दिया गया है, बल्कि आपराधिक मुकदमे की सुनवाई पहले की तरह जारी रहेगी।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार हाईकोर्ट पहुंची थी। राज्य सरकार का तर्क था कि सोनम रघुवंशी इस कथित सुनियोजित हत्या की मुख्य आरोपी है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। सरकार का कहना था कि हत्या जैसी संगीन वारदात में आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी। हालांकि हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद माना कि निचली अदालत के आदेश में ऐसा कोई कानूनी दोष या त्रुटि नहीं है, जिसके आधार पर जमानत रद्द की जाए। इसी कारण सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।
यह मामला मई 2025 में सामने आया था, जब इंदौर निवासी राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी विवाह के तुरंत बाद हनीमून मनाने के लिए मेघालय पहुंचे थे। 23 मई 2025 को सोहरा क्षेत्र की यात्रा के दौरान दोनों रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। बाद में उनकी किराये की स्कूटर लावारिस हालत में मिली, जिसके बाद बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया गया।
करीब दस दिन बाद, 2 जून 2025 को पूर्वी खासी हिल्स जिले के वेई सॉडॉन्ग फॉल्स के निकट एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने इसे दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या का मामला माना और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया।
मेघालय पुलिस की जांच के अनुसार, सोनम रघुवंशी ने कथित रूप से अपने पति की हत्या की साजिश रची थी। पुलिस का आरोप है कि इस साजिश में उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और तीन अन्य आरोपियों ने भी सहयोग किया। जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या की पूरी योजना हनीमून पर जाने से पहले ही तैयार कर ली गई थी और उसी योजना के तहत मेघालय में इस वारदात को अंजाम दिया गया। जांच के दौरान सोनम रघुवंशी को जून 2025 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए मेघालय लाया गया और जांच पूरी होने के बाद उसके खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया गया।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची थी, जबकि कथित प्रेमी राज कुशवाहा ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हमलावरों का समन्वय किया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मोबाइल फोन रिकॉर्ड जैसे कई अहम सबूत जांच का हिस्सा हैं, जिनके आधार पर अभियोजन अपना पक्ष अदालत में रख रहा है।
वहीं, सोनम रघुवंशी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उसके परिवार का लगातार कहना है कि उसे झूठा फंसाया गया है। परिवार ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए हैं और पहले इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर चुका है। मेघालय हाईकोर्ट का ताजा फैसला इस चर्चित हनीमून मर्डर केस में कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि अदालत ने केवल जमानत को बरकरार रखा है, न कि आरोपों पर अंतिम फैसला सुनाया है। ऐसे में अब सभी की नजरें ट्रायल कोर्ट में चल रही सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों को संदेह से परे साबित करना होगा और अदालत के अंतिम निर्णय से ही इस बहुचर्चित हत्याकांड की वास्तविक कानूनी परिणति तय होगी।



