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नोएल टाटा का बड़ा फैसला, ट्रेंट के बाद अब वोल्टास के चेयरमैन का भी छोड़ेंगे पद

टाटा ग्रुप से एक बड़ी खबर सामने आई है. ट्रेंट के चेयरमैन का पद छोड़ने के लगभग एक सप्ताह बाद नोएल टाटा ने टाटा समूह की एक और कंपनी वोल्टास के चेयरमैन के पद से भी हटने की मंगलवार को घोषणा की.

नोएल टाटा का बड़ा फैसला, ट्रेंट के बाद अब वोल्टास के चेयरमैन का भी छोड़ेंगे पद

नोएल टाटा ने कंपनी 72वीं एजीएम बैठक के दौरान ये घोषणा की है. कंपनी की आम बैठक में शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए नोएल टाटा ने कहा कि वोल्टास के चेयरमैन के तौर पर यह उनकी आखिरी एजीएम होगी. नोएल टाटा ने कहा, जैसा कि आप जानते होंगे, चेयरमैन के तौर पर यह मेरी आखिरी सालाना आम बैठक है.

मौजूदा टीम पर है पूरा भरोसा

नोएल टाटा ने एजीएम के दौरान कहा कि कंपनी ने आंतरिक पदोन्नति और बाहरी नियुक्तियों के ज़रिये अपनी टीम तैयार की है तथा उन्होंने भविष्य में तेजी से वृद्धि की प्रबंधन क्षमता पर भरोसा जताया. नोएल टाटा ने कहा कि मुझे इस टीम की झमता पर पूरा भरोसा है. नोएल टाटा 27 जनवरी, 2003 को वोल्टास के निदेशक मंडल में शामिल हुए थे. उन्हें एक सितंबर, 2017 को वोल्टास का गैरकार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया था. उन्होंने इशात हुसैन की जगह ली थी.

पिछले हफ्ते ही छोड़ा था ट्रेंट चेयरमैन का पद

इससे पहले नोएल टाटा ने 23 जून को भारत की प्रमुख फ़ैशन एवं लाइफ़स्टाइल रिटेलर कंपनी ट्रेंट के शेयरधारकों को संबोधित करते हुए भी इसी तरह की घोषणा की थी. नोएल टाटा, टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन भी हैं. वह इस साल नवंबर में 70 साल के हो जाएंगे. कंपनी कानून 2013 के तहत, किसी भी प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक को 70 साल या उससे अधिक उम्र होने पर नियुक्त नहीं किया जा सकता और न ही वह इस पद पर बना रह सकता है.

रतन टाटा के बाद बदला कंपनी पावर स्ट्रक्टर

टाटा ग्रुप के भीतर मौजूदा दौर की शुरुआत रतन टाटा के जाने के बाद हुई. इसके तुरंत बाद, रतन के सौतेले भाई नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन का पद संभाला. ये ट्रस्ट्स मिलकर टाटा संस के लगभग 66 फीसदी शेयर के मालिक हैं, जबकि कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी कंपनी SP ग्रुप के पास कंपनी के 18.4 फीसदी शेयर हैं. रतन टाटा के न रहने पर, कई ऐसे अहम फैसले जो पहले आम सहमति से लिए जाते थे, अब ट्रस्टियों की औपचारिक चर्चाओं के जरिए लिए जाने लगे. लगभग उसी समय, टाटा ट्रस्ट्स ने एक ऐसी व्यवस्था लागू की, जिसके तहत 75 साल से ज्यादा उम्र के नॉमिनी डायरेक्टर्स के कामकाज की हर साल समीक्षा होगी. इसी बात ने ट्रस्ट्स की व्यवस्था के भीतर पहले बड़े मतभेद की नींव रखी.

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