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RBI की रिपोर्ट: बाहरी झटकों के बाद भी भारत की हालत मजबूत बस इनसे है बड़ा खतरा

भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया ही देश की फाइनेंशियल कंडीशन मजबूत बनी हुई है. आरबीआई की ओर से जारी की गई फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में यह कहा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट संकट और बाहरी झटकों के बाद भी देश की वित्तीय हालत मजबूत है.

RBI की रिपोर्ट: बाहरी झटकों के बाद भी भारत की हालत मजबूत बस इनसे है बड़ा खतरा

रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत का बैंकिंग सिस्टम फिलहाल काफी मजबूत और सुरक्षित स्थिति में है. बैंकों के पास पर्याप्त पैसा और पूंजी है, जबकि उनके खराब कर्ज भी लगातार कम हो रहे हैं. यही वजह है कि अगर अर्थव्यवस्था को किसी बड़े झटके का सामना करना पड़े, तब भी बैंक उससे निपटने में सक्षम रहेंगे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनियां भी अच्छी स्थिति में हैं. उनकी कमाई बढ़ रही है और उनके खराब कर्ज में भी सुधार देखने को मिला है.

साइबर हमला सबसे बड़ा खतरा

हालांकि, रिजर्व बैंक ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है. उसके मुताबिक आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से होने वाले साइबर हमले वित्तीय क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दुनिया इस समय दो बड़े बदलावों से गुजर रही है. पहला, बढ़ते भूराजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात, और दूसरा, एआई तकनीक का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल.

रुकावटों के बाद भी इकोनॉमी मजबूत

उन्होंने कहा कि युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था अब तक मजबूत बनी हुई है. वहीं भारत ने भी बाहरी चुनौतियों के बावजूद मजबूत आर्थिक वृद्धि, कम महंगाई और कंपनियों की बेहतर वित्तीय स्थिति के दम पर अपनी मजबूती दिखाई है. हालांकि, आरबीआई का मानना है कि दुनिया भर में बढ़ते तनाव और अनिश्चितताओं को देखते हुए सतर्क रहने और वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाने की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक मजबूत पूंजी, नकदी के पर्याप्त भंडार, परिसंपत्ति गुणवत्ता में निरंतर सुधार और स्थिर मुनाफे के कारण पूरी तरह सुरक्षित और सुदृढ़ स्थिति में हैं. रिपोर्ट कहती है कि वृहद दबाव परीक्षण के नतीजे बताते हैं कि बैंकिंग प्रणाली संभावित झटकों को सहने के लिए मजबूत स्थिति में है. अन्य प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए भी समग्र पूंजी अनुपात के नियामकीय मानकों से पर्याप्त ऊपर बने रहने का अनुमान है.

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