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Ram Mandir Donation Scam: SIT जांच की समयसीमा 15 जुलाई तक बढ़ी, अब और पहलुओं की होगी जांच

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में चोरी का मामला लगातार नए खुलासे कर रहा है। अब सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस को इस मामले की भनक शुरुआत से ही थी। आरोप है कि ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ मिलकर पुलिस चोरी की रकम बरामद कराने में जुटी थी, लेकिन मामला दर्ज कराने में देरी की गई।

Ram Mandir Donation Scam: SIT जांच की समयसीमा 15 जुलाई तक बढ़ी, अब और पहलुओं की होगी जांच

अयोध्या में चल रही एसआईटी जांच की अवधि बढ़ा दी गई है। अब विशेष जांच दल को अपनी जांच पूरी करने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया गया है। इसके साथ ही जांच का दायरा भी बढ़ाया जाएगा, ताकि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा सके।  

CCTV फुटेज से उठे नए सवाल

हाल ही में सामने आए एक CCTV फुटेज में पुलिसकर्मी एक आरोपी अविनाश शुक्ला को कार में बैठाते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में एक काला बैग भी नजर आ रहा है, जिसमें कथित तौर पर बरामद की गई नकदी होने की बात कही जा रही है। यह फुटेज 5 जून का बताया जा रहा है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब पुलिस को पहले से घटना की जानकारी थी, तो तत्काल एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई?

मीडिया में खबर आने के बाद दर्ज हुई एफआईआर

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला 6 जून को मीडिया में सामने आया था। मामला सुर्खियों में आने और ट्रस्ट पर सवाल उठने के बाद एसआईटी जांच की मांग हुई। शुरुआती जांच के बाद 23 जून को एफआईआर दर्ज की गई। इससे पहले तक पुलिस अधिकारियों का कहना था कि उन्हें कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, इसलिए पुलिस की कोई भूमिका नहीं थी।

ट्रस्ट पर मामला दबाने की कोशिश के आरोप

सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारी पहले चोरी की रकम बरामद कर मामला शांत करना चाहते थे। इसी वजह से शुरुआत में पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। आरोप है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी खुद जांच में सक्रिय रहे और पुलिस भी उनके साथ समन्वय बनाकर काम करती रही।

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पूछताछ को लेकर भी उठे सवाल

सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की पहुंच ऊंचे स्तर तक होने के कारण पुलिस पूछताछ के दौरान भी पूरी सख्ती नहीं दिखा सकी। बताया जा रहा है कि औपचारिक पूछताछ की बजाय केवल बयान दर्ज किए गए। अब इस मामले में यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां बड़े जिम्मेदार लोगों तक पहुंच पाती हैं या नहीं।

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