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SBI Mutual Fund Nivesh Cafe: SIP से कैसे सुरक्षित होगा बच्चों का फ्यूचर? ऐसे करना है निवेश

SBI Mutual Fund Nivesh Cafe: SIP से कैसे सुरक्षित होगा बच्चों का फ्यूचर? ऐसे करना है निवेश

SIP में असली ताकत समय और कंपाउंडिंग से आती है.

आज के समय में हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता बच्चों का भविष्य है. अच्छी पढ़ाई, बेहतर करियर और लगातार बढ़ती महंगाई. इन सबके बीच सवाल यही है कि सही फाइनेंशियल प्लानिंग कैसे की जाए. इसी विषय पर SBI Mutual Fund के निवेश कैफे में बच्चों (जूनियर्स) के लिए निवेश की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई, जहां पेरेंट्स ने खुलकर अपने सवाल और शंकाएं रखीं.

हर किसी की अपनी सलाह, फैसला लेना मुश्किल

कार्यक्रम में साफ दिखा कि बच्चों के भविष्य को लेकर राय की कोई कमी नहीं है. कुछ पेरेंट्स सोने में निवेश को सुरक्षित मानते हैं, तो कुछ जमीन खरीदने को बेहतर समझते हैं. वहीं कई लोगों ने SIP और म्यूचुअल फंड को लंबी अवधि के लिए सही विकल्प बताया, जबकि कुछ ने टर्म प्लान और हेल्थ इंश्योरेंस को प्राथमिकता दी. चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि भारत में हर तीसरा व्यक्ति सलाह देता है, जिससे सही रास्ता चुनना और चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

प्लानिंग की नींव: फ्रेमवर्क और बैकवर्ड सोच

निवेश कैफे में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि बच्चों के लिए निवेश बिना ठोस प्लान के नहीं होना चाहिए. सबसे पहले एक स्पष्ट फ्रेमवर्क बनाना जरूरी है. इसके लिए बैकवर्ड कैलकुलेशन अपनाने की सलाह दी गई. यानी यह अनुमान लगाना कि आज इंजीनियरिंग, मेडिकल, एमबीए या लॉ जैसे कोर्स की फीस कितनी है और 1518 साल बाद यह खर्च कहां तक पहुंच सकता है. इसी अनुमान से आज के निवेश का रोडमैप तय किया जाना चाहिए.

सिर्फ रिटर्न नहीं, उतार-चढ़ाव भी समझें

चर्चा में यह भी बताया गया कि केवल पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं है. बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) को समझना उतना ही जरूरी है. इसी संदर्भ में इक्विटी म्यूचुअल फंड, हाइब्रिड फंड और सॉल्यूशन ओरिएंटेड चिल्ड्रन प्लान जैसे विकल्पों पर बात हुई. चिल्ड्रन प्लान म्यूचुअल फंड की एक अलग कैटेगरी है, जो खास तौर पर बच्चों की पढ़ाई जैसे लक्ष्यों के लिए बनाई जाती है और इसमें 5 साल का लॉक-इन होता है.

SIP, कंपाउंडिंग और स्टेप-अप का कमाल

SIP में असली ताकत समय और कंपाउंडिंग से आती है. जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाए, उतना बड़ा फायदा मिलता है. विशेषज्ञों ने सलाह दी कि छोटी रकम से शुरुआत करें और हर साल स्टेप-अप जरूर करें, ताकि महंगाई का असर कम हो सके. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा हो, निवेश की राशि भी बढ़ती जानी चाहिए. उदाहरण के तौर पर SIP की शुरुआत 2000 रुपये से की जा सकती है. जब बच्चा 6 साल का हो जाए, तो इसे बढ़ाकर 4000 रुपये किया जा सकता है. इसके बाद हर जन्मदिन पर SIP अमाउंट बढ़ाते रहना चाहिए. इसी प्रक्रिया को टॉप-अप या स्टेप-अप कहा जाता है, जो लंबे समय में बच्चों के भविष्य को मजबूत आधार देता है.

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