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सिर्फ रोटी गिनने से नहीं घटता वजन! जानिए पेट निकलने की असली वजह और आम गलतियां..

सिर्फ रोटी गिनने से नहीं घटता वजन! जानिए पेट निकलने की असली वजह और आम गलतियां..

जब गर्मियों में चिलचिलाती धूप पूरे दिन आपकी एनर्जी सोख लेती है, तो मानसून का आना गर्मी से राहत जैसा लगता है. चाय के साथ स्नैक्स खाने की जबरदस्त इच्छा के साथ-साथ, मॉनसून आपकी सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लाता है. बारिश के महीनों में मौसमी इन्फेक्शन, पेट खराब होना, फ्लू और एनर्जी की कमी आम बात है. इस मौसम में इम्यूनिटी में बदलाव, धीमे डाइजेशन सिस्टम और बैक्टीरिया और वायरस के ज्यादा संपर्क में आने जैसी स्थितियों से भी जूझ रहा होता है. ऐसे में आपकी डाइट बहुत जरूरी हो जाती है. खान-पान में कुछ समझदारी भरे बदलाव करके, आप अपने डाइजेशन को ठीक रख सकते हैं और एनर्जी लेवल को पूरी तरह स्थिर बनाए रख सकते हैं. आइए, कुछ ऐसे मौसमी फूड्स के बारे में जानते हैं जिन्हें डॉक्टर बारिश के मौसम की परेशानियों से बचने के लिए आपकी रोजाना की डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं.

करेला

बारिश के मौसम में सेहतमंद रहने के लिए डॉक्टर करेला खाने की सलाह देते हैं. इसका कड़वापन असल में इसके मजबूत एंटीवायरल और एंटी बैक्टीरियल गुणों की निशानी है. करेले में जरूरी विटामिन और ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो आपके लिवर को अच्छी तरह साफ करते हैं और पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं. करेला खाने से आपका शरीर उन पैरासाइट्स और पेट के नुकसानदायक बैक्टीरिया को प्राकृतिक रूप से खत्म कर पाता है जो दूषित पानी या स्ट्रीट फूड के जरिए आसानी से आपके शरीर में पहुंच जाते हैं.

खट्टे फल

हालांकि संतरा, मौसंबी और ऐसे ही दूसरे फल साल भर मिलते हैं, लेकिन मॉनसून के दौरान इनमें मौजूद विटामिन C की वजह से ये बहुत फायदेमंद होते हैं. विटामिन C इम्यून सिस्टम को ठीक से काम करने में अहम भूमिका निभाता है और शरीर को पौधों से मिलने वाले खाने से आयरन सोखने में भी मदद करता है. पैकेट वाले जूस के बजाय, जब भी हो सके साबुत फल चुनें ताकि आपको उनके प्राकृतिक फाइबर का भी फायदा मिल सके.

मूंग दाल

जब पेट खराब या असहज महसूस हो, तो डॉक्टर औरडायटीशियन अक्सर सबसे पहले मूंग दाल खाने की सलाह देते हैं. यह आसानी से पच जाती है, अच्छी क्वालिटी का प्लांट प्रोटीन देती है और इसमें फोलेट, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं.

चाहे इसे सादी दाल के तौर पर खाया जाए या खिचड़ी बनाकर, यह बिना भारीपन महसूस कराए पोषण देती है, इसलिए पाचन संबंधी परेशानी के समय यह खास तौर पर फायदेमंद होती है.

जामुन

जामुन उन फलों में से एक है जो ठीक उसी समय मिलते हैं जब आपके शरीर को इनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है. विटामिन C, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर जामुन इम्यूनिटी को मजबूत करने और ब्लड शुगर लेवल को सही रखने में मदद करता है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है.

जामुन में पाया जाने वाला ‘जाम्बोलिन’ कंपाउंड ब्लड ग्लूकोज के अचानक बढ़ने को कंट्रोल करने में असरदार साबित हुआ है. यह हल्का कसैला भी होता है, जो पाचन स्वास्थ्य में मदद करता है.

पपीता

जब मौसम आपके शरीर के अंदरूनी सिस्टम को धीमा कर देता है, तो पपीता पाचन में बहुत मदद कर सकता है. इस ट्रॉपिकल फल में ‘पपेन’ नाम का एक खास डाइजेस्टिव एंजाइम होता है. यह एंजाइम आपके पेट में भारी प्रोटीन को आसानी से तोड़ने में मदद करता है.

इसमें विटामिन C भी बहुत ज्यादा होता है, जो व्हाइट ब्लड सेल्स के बनने को बढ़ावा देता है. एक कटोरा ताजा पपीता खाने से पेट फूलने और कब्ज जैसी गंभीर समस्याओं से बचने में मदद मिलती है, जो मॉनसून के दौरान मेटाबॉलिज्म कम होने पर अक्सर लोगों को परेशान करती हैं.

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