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5 मिनट का Mini Stroke हो सकता है बड़ी चेतावनी, TIA के ये संकेत न करें इग्नोर

कुछ देर के लिए बोलने में दिक्कत, हाथपैर में अचानक कमजोरी या फिर धुंधला दिखना ये मिनी स्ट्रोक के लक्षण हैं. थोड़े टाइम बाद सब नॉर्मल हो जाता है. अगर किसी को ऐसी दिक्कत होती है तो उसे नजरअंदाज करने की भूल नहीं करनी चाहिए. एक्सपर्ट कहते हैं कि ज्यादातर लोग इसे थकान, कमजोरी या नॉर्मल प्रॉब्लम समझने की भूल करते हैं. बताया जाता है कि ये मिनी स्ट्रोक है जिसे ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक पुकारा जाता है. ये आगे चलकर बड़े स्ट्रोक की गंभीर चेतावनी है.

5 मिनट का Mini Stroke हो सकता है बड़ी चेतावनी, TIA के ये संकेत न करें इग्नोर

न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि TIA में मस्तिष्क के किसी हिस्से में कुछ समय के लिए ब्लड फ्लो कम हो जाता है. वैसे ये लक्षण कुछ मिनटों या एक घंटे के भीतर ठीक हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा टल गया है. यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो आने वाले दिनों या महीनों में बड़ा स्ट्रोक हो सकता है.

क्या होता है Mini Stroke ?

डॉ. आतम प्रीत सिंह कहते हैं कि मिनी स्ट्रोक या TIA को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. भले ही लक्षण कुछ मिनटों में पूरी तरह ठीक हो जाएं, लेकिन यह भविष्य में होने वाले बड़े स्ट्रोक का संकेत हो सकता है. यदि अचानक चेहरे का टेढ़ा होना, हाथपैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल पहुंचें.

एक्सपर्ट ने आगे बताया कि समय पर जांच और इलाज से बड़े स्ट्रोक और उससे होने वाली लकवे के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. ये सिचुएशन बताती है कि मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में कोई गंभीर समस्या हो सकती है, जिसे तुरंत जांचने की जरूरत है.

मिनी स्ट्रोक के बड़े लक्षण

चेहरे का एक तरफ झुक जाना

एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन

बोलने या दूसरों की बात समझने में कठिनाई

एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देना

अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना

बिना कारण तेज सिरदर्द होना

भले ही ये लक्षण 5 से 10 मिनट में ठीक हो जाएं, फिर भी तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है.

इन लोगों पर है ज्यादा खतरा

हाई ब्लड प्रेशर के मरीज

डायबिटीज

हाई कोलेस्ट्रॉल

धूम्रपान और तंबाकू का सेवन

मोटापा

हृदय रोग या अनियमित धड़कन

55 वर्ष से अधिक उम्र

जेनेटिक

Golden Hour क्यों है महत्वपूर्ण?

एक्सपर्ट बताते हैं कि स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट कीमती होता है. यदि मरीज को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाए, तो कई मामलों में ऐसी दवाएं और उपचार दिए जा सकते हैं जो दिमाग को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं. यही कारण है कि स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही इंतजार करने या घरेलू उपाय अपनाने के बजाय तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेनी चाहिए.

अस्पताल में कौनकौन सी जांच हो सकती हैं?

TIA का संदेह होने पर डॉक्टर मरीज की न्यूरोलॉजिकल जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर MRI या CT स्कैन, कैरोटिड डॉप्लर, ECG, इकोकार्डियोग्राफी और रक्त जांच कराई जा सकती है, ताकि स्ट्रोक के कारण का पता लगाया जा सके और भविष्य के जोखिम को कम किया जा सके.

कैसे करें बचाव?

स्ट्रोक से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि ब्लड प्रेशर पर ज्यादा फोकस किया जाए. एक उम्र के बाद नियमित रूप से बीपी, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए. धूम्रपान और शराब से दूरी बनानी चाहिए, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए, संतुलित आहार लेना चाहिए और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए. जिन लोगों को पहले TIA हो चुका है, उन्हें फॉलोअप में लापरवाही नहीं करनी चाहिए.

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