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हर काम अधूरा लगता है, बार-बार हाथ धोने की आदत भी है? एक्सपर्ट से जानिए OCD और पर्फेक्शनिज्म का अंतर..

हर काम अधूरा लगता है, बार-बार हाथ धोने की आदत भी है? एक्सपर्ट से जानिए OCD और पर्फेक्शनिज्म का अंतर..

17 साल की सारिका पढ़ाई के लिए दिल्ली के एक पीजी में रहती है। उसके साथ रहने वाले लोग जानते हैं कि उसे साफ-सफाई का बेहद ध्यान रहता है। वह दिन में कई बार हाथ धोती है, बार-बार किचन में जाकर गैस सिलेंडर चेक करती है और घर का ताला दो-तीन बार खींचकर देखने के बाद ही उसे तसल्ली मिलती है। आसपास के लोग उसकी इन आदतों को ‘परफेक्शनिज्म’ (हर काम एकदम सही करना) मानते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि इस तरह का व्यवहार और विचार कोई आदत नहीं बल्कि एक मानसिक विकार Obsessive-Compulsive Disorder (OCD) हो सकता है जो प्रभावित इंसान की पढ़ाई, नौकरी या सामाजिक रिश्तों में बाधा बनता है। इस परेशानी से ग्रसित इंसान को  किसी काम को बार-बार दोहराने के बाद भी मानसिक संतुष्टि महसूस नहीं होती?

फोर्टिस हेल्थकेयर में अदायु माइंडफुलनेस हॉस्पिटल में सलाहकार मनोचिकित्सक डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया अक्सर लोग इसे केवल एक आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक विकार है, जो समय के साथ व्यक्ति के आत्म-विश्वास और कार्यक्षमता को कमजोर कर देता है। आखिर OCD क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, यह क्यों होता है और मेडिकल साइंस में इसका क्या इलाज है? आइए मानसिक रोग विशेषज्ञ (Psychologist) से जानते हैं इसके पीछे की पूरी सच्चाई।

OCD क्या है?

डॉ. अग्रवाल ने बताया Obsessive–compulsive disorder (OCD) यानी ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति के मन में बार-बार ऐसे अनचाहे विचार (Obsessions), तस्वीरें या आशंकाएं आती हैं, जिन्हें वह चाहकर भी रोक नहीं पाता। इन विचारों से होने वाली घबराहट और बेचैनी को कम करने के लिए वह कुछ काम बार-बार करता है, जिन्हें कम्पल्शन (Compulsions) कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर बार-बार हाथ धोना, ताला जांचना या गैस बंद है या नहीं, इसे बार-बार चेक करना।

आदत और OCD में क्या अंतर है?

हर व्यक्ति में कुछ न कुछ आदतें या परफेक्शनिस्ट व्यवहार हो सकते हैं, लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उसे OCD है। डॉक्टर के अनुसार, जब ये विचार और व्यवहार इतने बढ़ जाएं कि व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, सामाजिक जीवन या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तभी इसे बीमारी माना जाता है।

क्या परफेक्शनिज्म भी OCD का हिस्सा है?

परफेक्शनिज्म OCD का एक लक्षण हो सकता है, लेकिन हर परफेक्शनिस्ट व्यक्ति OCD का मरीज नहीं होता। यदि परफेक्शनिज्म के साथ अन्य ऑब्सेसिव विचार और बार-बार किए जाने वाले व्यवहार भी मौजूद हों, तो डॉक्टर OCD की संभावना पर विचार करते हैं।

भारत में OCD कितना आम है?

डॉक्टर के अनुसार, OCD एक आम मानसिक स्वास्थ्य विकार है। मनोचिकित्सा विभागों में इसके मरीज अक्सर देखने को मिलते हैं। हालांकि, लोगों में अभी भी इसके सभी लक्षणों के बारे में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। अधिकांश लोग केवल बार-बार हाथ धोने को ही OCD समझते हैं, जबकि इसके और भी कई लक्षण हैं।

OCD के सामान्य लक्षण क्या हैं?

OCD के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षण हैं

  • बार-बार हाथ धोना।
  • बार-बार ताला, गैस या बिजली का स्विच चेक करना।
  • चीजों को बार-बार गिनना।
  • पढ़ाई करते समय एक ही पैराग्राफ को बार-बार पढ़ना।
  • किसी काम को बार-बार दोहराना क्योंकि तसल्ली नहीं होती।
  • मन में लगातार अनचाहे और परेशान करने वाले विचार आना।

OCD किस उम्र के लोगों में हो सकता है?

डॉक्टर के मुताबिक, OCD के लक्षण अक्सर किशोरावस्था (Teenage) में दिखाई देने लगते हैं, जब व्यक्तित्व का विकास हो रहा होता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह बचपन में भी शुरू हो सकता है और कुछ लोगों में वयस्क होने के बाद भी इसकी शुरुआत होती है।

OCD होने के पीछे क्या कारण हैं?

OCD के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें आनुवंशिक (Genetic), पारिवारिक (Hereditary) और पर्यावरणीय (Environmental) कारकों की भूमिका होती है। इसके अलावा मस्तिष्क में सेरोटोनिन (Serotonin) और नोरएपिनेफ्रीन (Norepinephrine) जैसे रसायनों का असंतुलन भी इस बीमारी से जुड़ा माना जाता है।

क्या हल्के OCD को नजरअंदाज करना चाहिए?

यदि किसी व्यक्ति में OCD के हल्के लक्षण हैं और वह अपनी दिनचर्या सामान्य रूप से संभाल पा रहा है, तब भी उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर का कहना है कि समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है। शुरुआती अवस्था में इलाज शुरू करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

OCD का रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ता है?

OCD व्यक्ति की एकाग्रता (Concentration), याददाश्त (Memory) और कार्यक्षमता (Productivity) को प्रभावित कर सकता है। मरीज का काफी समय बार-बार एक ही काम करने या एक ही विचार में उलझे रहने में निकल जाता है। गंभीर मामलों में इसका असर पारिवारिक रिश्तों, नौकरी और पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

क्या OCD सिर्फ साफ-सफाई तक सीमित है?

अक्सर लोगों का मानना है कि OCD सिर्फ साफ-सफाई तक ही सीमित है लेकिन ऐसा नहीं है। OCD केवल हाथ धोने या सफाई से जुड़ा नहीं है। कुछ लोगों को बार-बार यह डर सताता है कि उन्होंने कोई गलती कर दी है, किसी को नुकसान पहुंचा दिया है या कोई काम ठीक से नहीं हुआ। कुछ मरीजों में धार्मिक, नैतिक या हिंसक विचार भी बार-बार आ सकते हैं, जिन्हें वे खुद भी गलत मानते हैं।

OCD का इलाज कैसे किया जाता है?

यदि बीमारी शुरुआती या हल्की अवस्था में है, तो मनोवैज्ञानिक (Psychologist) द्वारा दी जाने वाली काउंसलिंग और साइकोथेरेपी से काफी लाभ मिल सकता है। लेकिन यदि बीमारी मध्यम या गंभीर हो जाए और व्यक्ति अपने विचारों या व्यवहार पर नियंत्रण न रख पाए, तो मनोचिकित्सक (Psychiatrist) दवाइयों की सलाह देते हैं।

क्या OCD पूरी तरह ठीक हो सकता है?

डॉक्टर के अनुसार अधिकांश मरीज सही इलाज से काफी हद तक ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में OCD दवाइयों से भी नियंत्रित नहीं हो पाता, जिसे ‘रेजिस्टेंट OCD’ कहा जाता है। ऐसे मामलों में rTMS (Repetitive Transcranial Magnetic Stimulation) और Modified ECT जैसी न्यूरो मॉड्यूलेशन तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि बार-बार आने वाले विचार, डर या दोहराए जाने वाले व्यवहार आपकी पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, तो उन्हें सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से OCD को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ से हुई बातचीत पर आधारित है और यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान (Diagnosis) या उपचार (Treatment) का विकल्प नहीं है

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