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आखिर पूरी होने जा रही खामेनेई की अंतिम इच्छा! जानिए क्यों इस पवित्र दरगाह में दफन होना चाहते थे ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर..

ईरान के मरहूम सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की आखिरी ख्वाहिश को आखिरकार पूरा किया जा रहा है. इसी साल 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में मारे गए अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तारीख और शेड्यूल का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है. उन्हें 9 जुलाई को उनके होमटाउन मशहद में शिया इस्लाम के सबसे सम्मानित और पवित्र स्थलों में से एक, ‘इमाम रजा की दरगाह’ के पास दफनाया जाएगा.

खामेनेई ने बहुत पहले ही यह वसीयत या इच्छा जाहिर की थी कि दुनिया से रुखसत होने के बाद उनके पार्थिव शरीर को इमाम रजा के साए में ही जगह मिले. शुक्रवार को ईरान में उनके 6 दिवसीय जनाजे के जुलूस की शुरुआत हो चुकी है, जहां लाखों की संख्या में शोक मनाने वाले लोग तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में अपने नेता को आखिरी विदाई देने उमड़ रहे हैं.

जानिए कैसा है खामेनेई के अंतिम संस्कार का पूरा शेड्यूल

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, सुप्रीम लीडर के अंतिम सफर को बेहद ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बनाने की तैयारी की गई है, जो दो देशों से होकर गुजरेगा.

1. 3 जुलाई : तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला प्रार्थना परिसर में खामेनेई के पार्थिव शरीर को आम जनता और दुनिया भर के प्रतिनिधियों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया.
2. 6 जुलाई : तेहरान की सड़कों पर एक विशाल और ऐतिहासिक जनाजा जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद है.
3. कोम और इराक का सफर: तेहरान के बाद इस जुलूस को ईरान के पवित्र शहर ‘कोम’ ले जाया जाएगा. इसके बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को पड़ोसी देश इराक के ऐतिहासिक शिया केंद्रों- नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा, जहां विशेष धार्मिक रस्में अदा की जाएंगी.
4. 9 जुलाई: अंतिम सफर अपने मुकाम पर पहुंचेगा. खामेनेई और उनके साथ मारे गए परिवार के सदस्यों को मशहद में इमाम रजा की दरगाह के पास सुपुर्द-ए-खाक (दफन) किया जाएगा.

क्यों इतनी खास है इमाम रजा की दरगाह और क्या थी खामेनेई की वसीयत?

इंटरनेशनल न्यूज आउटलेट्स और ईरान की वाना (WANA) न्यूज एजेंसी के अनुसार, अयातुल्ला खामेनेई का इमाम रजा की दरगाह के प्रति बेहद गहरा आध्यात्मिक झुकाव था. शिया इस्लाम में इमाम रजा को आठवां इमाम माना जाता है. मान्यता है कि पैगंबर मुहम्मद के बाद आए इमामों की पवित्र श्रृंखला में वे अपने दौर के सबसे बुद्धिमान, नैतिक और आध्यात्मिक रूप से श्रेष्ठ लीडर थे.

ईरानी संस्कृति में इमाम रजा को दया, उम्मीद और रहम की सबसे बड़ी निशानी माना जाता है. पवित्र शहर मशहद में स्थित उनकी सुनहरी गुंबद वाली दरगाह दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है. अपनी इसी गहरी आस्था के चलते खामेनेई ने इमाम रजा के करीब दफन होने की इच्छा जताई थी, जिसे अब ईरानी सरकार पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ पूरा करने जा रही है.

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