
Tirupati Temple Donation: भारत में आस्था और आध्यात्म का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही गहरा नाता यहां के मंदिरों और उनकी अकूत संपत्ति का है. करोड़ों श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों पर अपनी श्रद्धा से अरबों रुपये, सोना और चांदी दान करते हैं. लेकिन पिछले दिनों अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद देशभर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. इस मामले के सामने आने के बाद हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर देश के बेहद अमीर मंदिरों को कैसे मैनेज किया जाता है और भक्तों की तरफ से चढ़ाए गए पैसे का रख-रखाव कौन करता है. देश में आस्था, दौलत और ताकत का यह संगम कैसे काम करता है?
एक अनुमान के अनुसार देशभर में 8 से 10 लाख मंदिर मौजूद हैं. इन मंदिरों में से करीब चार लाख मंदिर और उनके ट्रस्ट सीधे तौर पर अलग-अलग राज्य सरकारों के विशेष धार्मिक कानून और भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत संचालित किये जा रहे हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि इन सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पास करीब नौ लाख करोड़ से ज्यादा की अनुमानित संपत्ति है. यह देश के कई बड़े राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है.
देश के अंदर तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मंदिर
जब सबसे ज्यादा मंदिरों वाले राज्यों की बात करते हैं तो दक्षिण भारत का तमिलनाडु इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. तमिलनाडु में करीब 79,154 पंजीकृत मंदिर हैं. इन मंदिरों का प्रबंधन राज्य सरकार के अधीन है. लिस्ट में दूसरे पायदान पर महाराष्ट्र है, जहां 77283 मंदिर रजिस्टर्ड हैं. वेस्ट बंगाल 53,658 मंदिरों के साथ तीसरे नंबर पर है. सरकारी नियंत्रण से बाहर वाले मंदिरों को आमतौर पर निजी ट्रस्ट, विभिन्न अखाड़े या वहां के पारंपरिक पुजारियों के जरिये चलाया जाता है.
बनारस और काशी में कौन संभालता है व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में 37,500 से ज्यादा पंजीकृत मंदिर और धार्मिक ट्रस्ट काम कर रहे हैं. राज्य के तीन सबसे अहम धार्मिक स्थल यानी काशी, अयोध्या और मथुरा में मंदिरों का संचालन पूरी तरह या आंशिक रूप से सरकार की देखरेख में होता है. बनारस का काशी विश्वनाथ मंदिर पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में है. यहां की व्यवस्था का जिम्मा वाराणसी के कमिश्नर की अध्यक्षता वाले बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के पास है. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और उसके प्रबंधन के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा 15 सदस्यीय ट्रस्ट का गठन किया गया था. मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है.
मंदिरों में करोड़ों का दान करते हैं श्रद्धालु
राम मंदिर में चोरी की घटना सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो श्रद्धालु हर साल देश के मंदिरों में करोड़ों का दान करते हैं, उनके अटूट विश्वास को कैसे बहाल रखा जाए. जानकारों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई बार अपने फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि मंदिरों को चलाना या उनके रोजमर्रा के काम देखना सरकारों का काम नहीं है, फिर भी राज्य सरकारें इन धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करती हैं. अयोध्या मामले का उदाहरण देते हुए जानकारों का कहना है कि महंत नृत्य गोपाल दास जी को छोड़कर ट्रस्ट में ज्यादातर बाहरी लोगों को शामिल किया गया. इन लोगों के पास मंदिर प्रशासन और इतने बड़े पैमाने पर आने वाले दान को संभालने का किसी तरह का अनुभव नहीं था.
बांके बिहारी के खातों में 250 करोड़ से ज्यादा जमा
दूसरी तरफ, मथुरा के बांके बिहारी मंदिर की बात करें तो वहां के बैंक खातों में 250 करोड़ से ज्यादा की राशि जमा है. हालांकि वहां गोसाइयों के आपसी विवाद के चलते अदालत में करीब 15 मामले लंबित हैं. लेकिन दान को लेकर किसी तरह का घोटाला सामने नहीं आया है. अदालत द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त जज की निगरानी को भी जानकारा स्थायी समाधान नहीं मानते. उनका सुझाव है कि मंदिरों के प्रबंधन में उन परिवारों और पारंपरिक लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जो सदियों से उस सिस्टम से जुड़े हैं. सभी वित्तीय लेनदेन पूरी तरह बैंकों के जरिये होना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सरकार को पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेने की जरूरत न पड़े.
तिरुमाला तिरुपति में आता है सबसे ज्यादा दान
देश के सबसे ज्यादा दान प्राप्त करने वाले मंदिरों में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम सबसे आगे है. इस मंदिर को हर साल चढ़ावे में 1,880 करोड़ रुपये मिलते हैं. ऑनलाइन टिकट की बिक्री और प्रसादम के जरिये करीब 1,000 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी होती है. इस विशाल साम्राज्य को संभालने के लिए आंध्र सरकार के नियंत्रण वाला मजबूत ट्रस्ट काम करता है. किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसकी गुंजाइश कम करने के लिए तिरुपति मंदिर में अब यूपीआई बेस्ड डिजिटल दान प्रणाली को मजबूत कर दिया गया है. यदि कोई भक्त सोना या चांदी दान करना चाहता है तो उसे सीधे एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिस में जाकर रसीद लेनी होती है.
वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का अनूठा सुरक्षा मॉडल
तिरुपति की तरह ही देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र जम्मू-कश्मीर का माता वैष्णो देवी मंदिर है. यहां भी भक्त भारी मात्रा में सोना-चांदी चढ़ाते हैं. आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 साल में माता के दरबार में 1,000 किलो से ज्यादा सोना चढ़ाया जा चुका है. श्राइन बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार मंदिर को सोने-चांदी के अलावा हर साल करीब 250 करोड़ का नकद चढ़ावा मिलता है. इस पूरे परिसर का संचालन श्राइन बोर्ड करता है, जिसके अध्यक्ष खुद जम्मू-कश्मीर के एलजी होते हैं.
बिना जेब वाली ड्रेस और ओपन हाल में गिनती
वैष्णो देवी में दान के रख-रखाव और गिनती की व्यवस्था बहुत कड़ी है. मंदिर में आने वाले दान की गिनती खुले हॉल में की जाती है, यह काम पूरी तरह से अर्धसैनिक बलों की कड़ी निगरानी में होता है. इस काम में लगे कर्मचारियों के लिए खास नियम यह है कि वे बिना जेब वाली ड्रेस पहनते हैं. इससे कोई भी सिक्का या नोट छिपाया नहीं जा सकता. इस पूरे प्रोसेस की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और अधिकारियों के जरिये 24 घंटे की जाती है. यही नहीं, सोने और चांदी के चढ़ावे को पिघलाने और संभालने का काम भी MMTC और बैंक अधिकारियों की देखरेख में होता है.
नौ लाख करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति
अगर देश के प्रमुख मंदिरों को मिलने वाले दान के आंकड़ों पर नजर डालें तो तिरुपति मंदिर को करीब 1,880 करोड़ रुपये, माता वैष्णो देवी मंदिर को 250 करोड़ रुपये, अयोध्या राम मंदिर को 150 करोड़ रुपये, मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर को 100 करोड़ रुपये, काशी विश्वनाथ मंदिर को 80 करोड़ रुपये और जगन्नाथ पुरी मंदिर को सालाना 18 करोड़ का दान मिलता है. ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश के शीर्ष 10 सबसे अमीर मंदिरों की कुल संपत्ति नौ लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा आंकी गई है.
पिछले दो साल में तेजी से बढ़ा आंकड़ा
पिछले दो साल के दौरान सोने की कीमतों में आई भारी तेजी और श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण इन मंदिरों की संपत्ति में बड़ा उछाल आया है. तिरुपति मंदिर के पास 3 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति होने का अनुमान है. इस मंदिर के पास अलग-अलग बैंकों में 10 टन से ज्यादा सोना जमा है. केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर अपने गुप्त ‘तहखानों’ के लिए दुनियाभर में मशहूर है. इसमें प्राचीन सोने के सिक्के, हीरे, जवाहरात और बहुमूल्य मूर्तियां भरी हुई हैं. इस मंदिर के ट्रस्ट के पास भी सैकड़ों एकड़ महंगी जमीन है.



