भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने Red Bull, Sting समेत कई मशहूर पेय ब्रांड्स को नोटिस जारी किया है. FSSAI का कहना है कि भारत के खाद्य सुरक्षा नियमों में “एनर्जी ड्रिंक” नाम की कोई मान्यता या तय मानक नहीं है. ऐसे में कंपनियां अपने उत्पादों को ‘एनर्जी ड्रिंक’ बताकर बेचने और ऊर्जा बढ़ाने जैसे दावे करने के लिए नियमों के दायरे में आ सकती हैं. इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने भी स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की बिक्री पर सख्ती दिखाई है.

इन ब्रांड्स को मिला नोटिस
FSSAI ने बताया कि उसने Hell Energy Drink, Adrenaline Rush Energy Drink, Red Bull Energy Drink और Sting Energy Drink को नोटिस भेजा है. नियामक संस्था का कहना है कि भारत में ‘एनर्जी ड्रिंक’ के लिए कोई अलग मानक तय नहीं किया गया है. इसलिए इस नाम का इस्तेमाल और इससे जुड़े दावे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं. FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया कि फूड कैटेगरी सिस्टम का इस्तेमाल किसी उत्पाद का नाम तय करने या उसकी लेबलिंग के लिए नहीं किया जा सकता.
इन दावों पर जताई आपत्ति
FSSAI ने कंपनियों के उन दावों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें कहा जाता है कि ये ड्रिंक्स शरीर में ऊर्जा बढ़ाती हैं, फोकस बेहतर करती हैं, दिमाग को सक्रिय बनाती हैं या सामान्य कमजोरी दूर करने में मदद करती हैं. नियामक के मुताबिक, खाद्य उत्पादों के लिए इस तरह के चिकित्सीय या कार्यात्मक दावे नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं हैं. FSSAI ने कहा कि वह ब्रांडिंग और लेबलिंग पर निगरानी और सख्त करेगा ताकि उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाया जा सके.
महाराष्ट्र सरकार ने भी उठाया बड़ा कदम
इधर, महाराष्ट्र सरकार ने फैसला लिया है कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में Sting और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री नहीं होगी. यह निर्णय बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल ने कहा कि यदि किसी स्कूल के आसपास ऐसे उत्पाद बिकते पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी. साथ ही स्कूलों को छात्रों के बीच जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पेय पदार्थों में कैफीन और चीनी की मात्रा अधिक होती है, जिसका बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.



