
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राजू कुमार सिंह को अपनी विधानसभा की सदस्यता से हाथ धोना पड़ सकता है। लगभग साढ़े 7 साल पहले हुई एक गलती की वजह से उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा गया है। राजू सिंह को दिल्ली की एक अदालत ने गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट में दोषी करार देते हुए 4 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह मामला 31 दिसंबर 2018 को दिल्ली के एक फार्म हाउस में नए साल के जश्न के मौके पर आयोजित एक पार्टी का है। जब राजू सिंह की बंदूक से चली गोली से एक महिला डॉक्टर की जान चली गई थी।
गोली लगने से जान गंवाने वालीं महिला डॉक्टर का नाम अर्चना गुप्ता था। वह बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह के भाई के दोस्त की पत्नी थीं। उनकी उम्र उस समय लगभग 45 साल थी। बताया गया कि विधायक के भाई संजीव सिंह के दिल्ली स्थित फार्म हाउस में न्यू ईयर पार्टी का आयोजन किया गया था। रात के समय डीजे पर गाने चल रहे थे। पार्टी में मौजूद अधिकतर लोग डांस फ्लोर पर थिरक रहे थे।
तभी वहां पर हर्ष फायरिंग होती है और पलक झपकते ही डांस फ्लोर पर एक महिला गिर पड़ती हैं। उनके शरीर से खून बहने लगता है। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया जाता है, जहां इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को उनकी मौत हो जाती है। मृतका अर्चना के पति विकास गुप्ता ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने उस रात राजू सिंह और ड्राइवर हरि सिंह को अपने-अपने हथियारों से गोली चलाते देखा था।
जब कांड हुआ तब विधायक नहीं थे राजू सिंह
यह घटना जब हुई तब राजू कुमार सिंह विधायक नहीं थे। हालांकि, इससे पहले वह लोजपा और जेडीयू से एमएलए रह चुके थे। इसके बाद साल 2020 में उन्होंने साहेबगंज सीट से विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से चुनाव लड़ा और जीत गए। फिर वह वीआईपी छोड़ बीजेपी में चले गए। 2025 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर ही फिर से चुनाव जीता। वह पूर्ववर्ती नीतीश सरकार में पर्यटन मंत्री भी रह चुके हैं।
राजू सिंह पर लगे सबूत मिटाने के भी आरोप
महिला की गैर इरादतन हत्या के मामले में बीजेपी विधायक पर सबूत मिटाने के भी आरोप लगे। पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के बाद राजू सिंह के कहने पर डांस फ्लोर पर खून पौंछ दिया गया था, ताकि साक्ष्य को मिटा दिया जाए। पार्टी में मौजूद डीजे संचालक ने पुलिस के सामने इसकी पुष्टि भी की थी।
नेपाल भागने की फिराक में थे राजू सिंह, बॉर्डर से पकड़े गए
अर्चना गुप्ता की मौत के बाद राजू कुमार सिंह के खिलाफ केस दर्ज हो गया था। पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह नेपाल भागने की फिराक में थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से नेपाल बॉर्डर पर ही गिरफ्तार कर लिया। ट्रायल के दौरान उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
कोर्ट में रिहाई के लिए गिड़गिड़ाए विधायक राजू सिंह
बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह ने दिल्ली की राउज एवेन्यु कोर्ट में शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान जज से रिहाई की मांग की। उन्होंने दलील दी कि जिस महिला की मौत हुई वह उनकी भाभी जैसी थीं। उनकी हत्या का कोई इरादा नहीं था। गोली चलने से गलती से उनकी मौत हो गई थी।
वहीं, राजू सिंह के वकील ने दलील दी कि अच्छे आचरण के चलते उन्हें रिहा कर दिया जाए या फिर सजा में नरमी बरती जाए। ताकि उनकी विधायकी ना जा सके। हालांकि, कोर्ट ने उनकी एक दलील नहीं सुनी और 4 साल की सजा सुनाकर विधायक से पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दे दिया।
राजू सिंह की विधायकी पर खतरा, साहेबगंज में हो सकते हैं उपचुनाव
अब राजू सिंह की विधायकी पर खतरा मंडरा गया है। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत 2 साल से अधिक की सजा होने पर विधानसभा सदस्यता स्वतः ही रद्द हो जाती है। कोर्ट का आदेश जल्द ही बिहार विधानसभा के स्पीकर के पास पहुंचेगा। नियमों के तहत स्पीकर को उनकी सदस्यता रद्द करनी होगी। हालांकि, अगर ऊपरी अदालत से राजू सिंह को सजा में राहत मिलती है तो उनकी विधायकी बरकरार रहेगी। अगर उनकी सदस्यता रद्द होती है तो साहेबगंज सीट पर 6 महीनों के भीतर उपचुनाव कराया जाएगा।



