Teejan Bai Passed Away: प्रसिद्ध पंडवानी गायिका गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का देर रात निधन हो गया। रायपुर एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 70 साल की थीं। उन्होंने 13 साल की उम्र से अपनी आवाज का जादू बिखेरना शुरू कर दिया था।

तीजन बाई पिछले कुछ समय से बीमार चल रहीं थीं। शनिवार, 4 जुलाई की देर रात 3.15 बजे रायपुर एम्स में उनका निधन हुआ।
पंडवानी गायिकी को दुनिया में पहचान दिलाई
तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी गायिकी को देश से लेकर विदेशों तक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को मंच पर प्रस्तुति की कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में सुमार किया।
भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।
जानें, तीजन बाई के बारे में
छत्तीसगढ़ के भिलाई के गांव गनियारी में जन्मी तीजन बाई के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था।
तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गातेसुनाते देखतीं थीं और धीरेधीरे उन्हें ये याद होने लगी।
उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया।
13 साल की उम्र में तीजन बाई ने अपनी पहली मंच प्रस्तुति दी।
1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2007 में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया गया।
एक दिन प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तभी से तीजन बाई का जीवन बदल गया।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी समेत कई लोगों के सामने देशविदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की और मॉरीशस सहित 17 से अधिक देशों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी गायिका का डंका बजाया।
पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित
कला के क्षेत्र में तीजन बाई के इसी बेजोड़ योगदान के लिए भारत सरकार और अन्य संस्थाओं ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा। उन्हें साल 1988 में पद्म श्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 2018 में उन्हें प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जापानी पुरस्कार ‘फुकुओका पुरस्कार’ मिला और 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से विभूषित किया गया। इसके अलावा बिलासपुर विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डी. लिट की मानद उपाधि भी दी गई।
लंबे समय से चल रहीं थीं बीमार
तीजन बाई जीवन के आखिरी पड़ाव में काफी कठिन दौर से गुजरीं। बड़े बेटे की मौत के सदमे के बाद उन्होंने अपनी ब्लड प्रेशर की दवाई लेना बंद कर दिया था, जिसके कारण साल 2024 में उन्हें अचानक पैरालिसिस यानी लकवा मार गया। तब से वह लगातार बीमारी चल रही थीं, जिसके कारण उनका शरीर बहुत कमजोर हो गया था और वह लंबे समय से बिस्तर पर थीं।
हाल ही में फेफड़ों में पानी भरने, निमोनिया और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत होने के बाद उन्हें 27 मई को एम्स रायपुर के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान शनिवार, 4 जुलाई की रात 3:15 बजे उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।
साल 2019 में मिला पद्म विभूषण सम्मान
1994 में श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान
1996 में संगीत नाट्य अकादमी सम्मान
1998 में देवी अहिल्या सम्मान
1988 में पद्मश्री से सम्मान
1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
2003 में डी. लिट बिलासपुर विश्वविद्यालय
2003 में पद्म भूषण से सम्मानित
2016 में एम एस सुब्बालक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार
2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित
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