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UP चुनाव में 2017 दोहराने की तैयारी में BJP! योगी के प्लान ने बढ़ाई अखिलेश की टेंशन, NDA बैठक की इनसाइड स्टोरी

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। राजधानी लखनऊ में रविवार को एनडीए के सहयोगी दलों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें चुनावी रणनीति, संगठनात्मक समन्वय और भविष्य की सीट शेयरिंग समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी गठबंधन के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी।

UP चुनाव में 2017 दोहराने की तैयारी में BJP! योगी के प्लान ने बढ़ाई अखिलेश की टेंशन, NDA बैठक की इनसाइड स्टोरी
UP चुनाव में 2017 दोहराने की तैयारी में BJP! योगी के प्लान ने बढ़ाई अखिलेश की टेंशन, NDA बैठक की इनसाइड स्टोरी

बैठक के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने में सक्षम है, लेकिन एनडीए के सभी सहयोगी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि गठबंधन के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय के जरिए उत्तर प्रदेश को विकास की नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए भरोसा जताया कि सेवा और सुशासन के आधार पर एनडीए वर्ष 2027 में फिर से सरकार बनाएगा।

2017 जैसी जीत दोहराने पर फोकस

बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी गई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और संगठन मिलकर काम करेंगे ताकि 2017 जैसी ऐतिहासिक जीत दोबारा हासिल की जा सके। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की जनता विकास, सुरक्षा और सुशासन चाहती है। उनके अनुसार, राज्य के लोग कानून व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर भाजपा के साथ हैं।

भाजपा के लिए 2017 का विधानसभा चुनाव एक बड़ा राजनीतिक मानक माना जाता है, जब एनडीए ने 403 में से 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि 2022 में यह आंकड़ा घटा, जबकि समाजवादी पार्टी ने अपनी स्थिति मजबूत की। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा अब संगठनात्मक स्तर पर और अधिक सक्रिय दिखाई दे रही है।

सहयोगी दलों ने दिया जीत का फॉर्मूला

बैठक में शामिल के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा कि गठबंधन का उद्देश्य सबसे मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतारना होगा, चाहे वह किसी भी सहयोगी दल से हो। निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की है।

सीट शेयरिंग को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर उचित समय आने पर निर्णय लिया जाएगा और उन्हें सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। अपना दल के नेता आशीष पटेल ने भी माना कि बैठक का प्रमुख उद्देश्य भाजपा और उसके सहयोगी दलों के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर संवाद स्थापित करना था।

संगठनात्मक मजबूती पर जोर

भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी का मजबूत संगठन, कार्यकर्ताओं का नेटवर्क और विकास आधारित राजनीति उसकी सबसे बड़ी ताकत है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता जाति, क्षेत्र और परिवारवाद से ऊपर उठकर संगठन के लिए काम करता है।

राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि लखनऊ में हुई इस रणनीतिक बैठक का असर आगामी विधानसभा चुनावों में किस रूप में दिखाई देता है और एनडीए का साझा चुनावी फार्मूला कितना प्रभावी साबित होता है।

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