पटना
राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इकोटूरिज्म को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इको टूरिज्म का व्यापक विस्तार होगा।

वर्तमान में बिहार में 10 से 15 सक्रिय इकोटूरिज्म स्थल हैं, जबकि 24 से अधिक प्रमुख स्थलों का विकास तेजी से किया जा रहा है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, जलप्रपात और पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं।
सरकार ने 50 से अधिक नए संभावित इकोटूरिज्म स्थलों की पहचान भी की है। लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में राज्य में इकोटूरिज्म स्थलों की संख्या बढ़ाकर 60 से 70 तक पहुंचाई जाए।
विभाग के अनुसार बिहार के प्रमुख इकोटूरिज्म स्थलों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व सबसे महत्वपूर्ण है। यह राज्य का एकमात्र टाइगर रिजर्व है।
कैमूर को टाइगर रिजर्व के रूप में किया जा रहा विकसित
यह तराई के घने जंगलों, बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
इसके अलावा कैमूर वन्यजीव अभयारण्य, जिसे झरनों और ट्रेकिंग के लिए जाना जाता है, दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जा रहा है।
भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य, विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, कावर झील पक्षी अभयारण्य, राजगीर का पहाड़ी क्षेत्र, ककोलत जलप्रपात, घोड़ा कटोरा, बराबरगुरुपा पहाड़ियां और सूरजपुर वेटलैंड भी राज्य के प्रमुख इकोटूरिज्म स्थलों में शामिल हैं।
विशेष रूप से विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य में नाव से डॉल्फिन देखने का अनूठा अनुभव मिलता है, जबकि कावर झील, जो एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में शामिल है, सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा बनती है।
202627 तक कई परियोजनाएं होंगी पूरी
सरकार ने सहरसा स्थित मत्स्यगंधा झील के समग्र विकास की योजना बनाई है। यहां सॉवेनियर शॉप, सुपर ट्री, ग्लास ब्रिज, एक्सपीरियंस सेंटर समेत कई आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का निर्माण वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं, पश्चिम चंपारण के लवकुश पार्क और वाल्मीकिनगर आइकॉनिक टूरिज्म पार्क के व्यापक विकास कार्य को वर्ष 2027 तक पूरा करने की योजना है।
इसके अलावा मां मुंडेश्वरी धाम में धर्मशाला के बेहतर उपयोग के लिए आसपास जंगल सफारी और अन्य इकोटूरिज्म गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे पर्यटन स्थल
पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए विकसित किए जा रहे सभी इकोटूरिज्म स्थलों पर नेचर ट्रेल, वॉच टावर, इकोकॉटेज, होमस्टे, डिजिटल साइनेज और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इससे पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच सुरक्षित और सुविधाजनक पर्यटन का अनुभव मिलेगा।
स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि बिहार इकोटूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य सतत पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न केवल देशविदेश के पर्यटक बिहार की ओर आकर्षित होंगे, बल्कि राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। पर्यटन विभाग ने अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से 20 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।



