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भारतीय शेयर बाजार में नई बुल रन की उम्मीद, मजबूत अर्थव्यवस्था से बनेगा तेजी का माहौल

नई दिल्ली
भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से उतारचढ़ाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन अब कई ऐसे बड़े आर्थिक संकेत सामने आ रहे हैं, जो आने वाले सालों में बाजार के लिए नई तेजी यानी अगली ‘बुल रन’ की नींव रख सकते हैं। मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि इस बार तेजी केवल सस्ते पैसे या विदेशी निवेश के दम पर नहीं, बल्कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ती कॉर्पोरेट कमाई, घरेलू निवेशकों की ताकत और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती अहमियत के कारण देखने को मिल सकती है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

भारतीय शेयर बाजार में नई बुल रन की उम्मीद, मजबूत अर्थव्यवस्था से बनेगा तेजी का माहौल

पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रूसयूक्रेन और पश्चिम एशिया के तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और रुपये में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई थी। लेकिन, अब तस्वीर धीरेधीरे बदलती नजर आ रही है। कई ऐसे मैक्रोइकोनॉमिक संकेत हैं, जो भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में जाते दिख रहे हैं।

सबसे पहला बड़ा संकेत भारतीय रुपये की मजबूती और स्थिरता है। विदेशी निवेशक किसी भी देश में निवेश करने से पहले वहां की मुद्रा की स्थिति को काफी महत्व देते हैं। अगर रुपया स्थिर रहता है, तो विदेशी निवेशकों को मुद्रा में होने वाले नुकसान का डर कम रहता है। इसके साथ ही आयातित महंगाई पर भी कंट्रोल रहता है और कंपनियों के लिए भविष्य की लागत का अनुमान लगाना आसान हो जाता है। इससे निवेश का माहौल मजबूत होता है।

दूसरा बड़ा कारण भूराजनीतिक तनाव में कमी है। पिछले दो सालों में पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रही। तेल की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन प्रभावित हुई। अब अगर यह तनाव कम होता है, तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वे फिर से उभरते बाजारों, खासकर भारत की ओर रुख कर सकते हैं।

तीसरा और बेहद अहम कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम होता है, महंगाई घटती है, सरकार पर वित्तीय दबाव कम होता है और कंपनियों की लागत भी घटती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, केमिकल और FMCG जैसे कई सेक्टरों की कमाई बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई कंट्रोल में रहने पर RBI के पास ब्याज दरों को लेकर अधिक लचीलापन रहता है, जिससे आर्थिक विकास को और गति मिल सकती है।

चौथा और सबसे मजबूत संकेत घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत है। पहले भारतीय शेयर बाजार काफी हद तक विदेशी निवेशकों पर निर्भर रहता था, जब भी विदेशी निवेशक बिकवाली करते थे, बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिलती थी। लेकिन, अब स्थिति बदल चुकी है। SIP के जरिए हर महीने म्यूचुअल फंड में आने वाला पैसा लगातार बढ़ रहा है। करोड़ों भारतीय अब नियमित निवेश कर रहे हैं, जिससे घरेलू निवेश बाजार को मजबूती मिल रही है। यही वजह है कि हाल के सालों में FPI की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा।

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है या वे फिर से खरीदारी शुरू करते हैं, तो भारतीय बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। मजबूत रुपया, सस्ता कच्चा तेल, घटता वैश्विक तनाव और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी मिलकर बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह भी याद रखना चाहिए कि शेयर बाजार कभी भी सीधी रेखा में नहीं चलता। बीचबीच में उतारचढ़ाव आते रहेंगे और कुछ शेयरों का मूल्यांकन अभी भी महंगा माना जा रहा है। इसलिए केवल तेजी की उम्मीद में बिना रिसर्च के निवेश करना सही नहीं होगा। अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में लंबे समय के नजरिए से निवेश करना और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना हमेशा बेहतर रणनीति मानी जाती है।

मौजूदा आर्थिक संकेत यह इशारा कर रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। अगर यही रुझान आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले सालों में भारतीय शेयर बाजार की अगली बड़ी बुल रन की शुरुआत इसी दौर से मानी जा सकती है। निवेशकों के लिए यह समय बाजार की दिशा को समझने और लंबी अवधि की रणनीति बनाने का हो सकता है।

 

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