भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों और दलाल स्ट्रीट के लिए एक बेहद रोमांचक और बड़ी खबर सामने आई है. वैश्विक वित्तीय दिग्गज और दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया इक्विटी स्ट्रेटेजिस्ट रिधम देसाई ने भारतीय बाजार के भविष्य को लेकर एक बेहद सकारात्मक और चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है. ईटी को दिए एक इंटरव्यू में रिधम देसाई ने कहा कि इस बात की 25 फीसदी संभावना है कि अगले 1 साल के भीतर बीएसई सेंसेक्स 1,00,000 के ऐतिहासिक आंकड़े को छू सकता है. यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास और वित्तीय बाजार का अब तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होगा.

क्या एक लाख का लेवल छुएगा सेंसेक्स?
भले ही विदेशी निवेशक दलाल स्ट्रीट से भारी मात्रा में पैसा निकाल रहे हों और पिछले 2 सालों में मार्केट से लगभग जिरो रिटर्न मिला हो, फिर भी मॉर्गन स्टेनली के इंडिया इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिधम देसाई को लगता है कि अगले 12 महीनों में सेंसेक्स के 1 लाख के आंकड़े तक पहुंचने की 25 फीसदी संभावना है. भारत की बेहतर होती मैक्रो स्थिति और अर्निंग्स साइकिल इस तेजी वाले अनुमान का आधार हैं.
हालांकि 1 लाख का आंकड़ा एक तेज़ी वाला लेकिन मुमकिन नतीजा माना जा रहा है, फिर भी मॉर्गन स्टेनली का बेस केस ज्यादा सतर्कता वाला है. इसमें जून 2027 तक सेंसेक्स के लिए 89,000 का टारगेट रखा गया है और इस इसकी 50 फीसदी संभावना जताई गई है. इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से 15 फीवसदी की बढ़त की गुंजाइश है. यह अनुमान भारत की मैक्रो स्टेबिलिटी में सुधार, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में बढ़ोतरी और रियल ग्रोथ व रियल इंटरेस्ट रेट के बीच लगातार पॉज़िटिव अंतर बने रहने पर टिका है.
देसाई का तर्क है कि सेंसेक्स का ट्रेलिंग P/E मल्टीपल 23.5x होगा, जो 25 साल के औसत 22x से ज्यादा है.” वे भारत के मीडियमटर्म ग्रोथ साइकिल में ज्यादा भरोसे, कम बीटा कैरेक्टरिस्टिक्स और अनुमान लगाने लायक पॉलिसी माहौल के आधार पर इस वैल्यूएशन प्रीमियम को सही ठहराते हैं. बेस केस में मजबूत घरेलू ग्रोथ, स्थिर ग्लोबल ग्रोथ, मौजूदा लेवल्स से कम तेल की कीमतें और “आसान मॉनेटरी पॉलिसी” को आधार माना गया है. साथ ही, इसमें एक सपोर्टिव प्राइमरी मार्केट की भी उम्मीद है जहां रिटेल निवेश का फ्लो सप्लाई से ज्यादा बना रहे.
मॉर्गन स्टेनली भारत को लेकर क्यों उत्साहित है?
रिपोर्ट के अनुसार भारत तेजी से बढ़ते निवेश, ब्याज दरों के मुकाबले बढ़ती रियल ग्रोथ रेट और पॉलिसी से जुड़ी अनिश्चितता में कमी के कारण ग्रोथ के एक मज़बूत दौर में प्रवेश कर रहा है. मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में निवेशसेGDP अनुपात बढ़कर 37.5 फीसदी हो जाएगा, जिसे एनर्जी, माइनिंग, डिफेंस, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में होने वाले कैपिटल एक्सपेंडिचर से सपोर्ट मिलेगा.
कमाई के मोर्चे पर, रिपोर्ट इस बात को इंडिकेट करती है कि कमाई का साइकिल फिर से शुरू होने वाला है, जिसमें सेंसेक्स की कमाई के वित्त वर्ष 2029 तक सालाना 16 फीसदी और 19 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है. रणनीतिकारों का कहना है कि “कमाई में तेजी आने की संभावना है”, और वे ऐसे प्रमुख इंडीकेटर्स और मॉडल्स की ओर इशारा करते हैं जो मैक्रो वेरिएबल्स और भविष्य की कमाई में वृद्धि के बीच मज़बूत संबंध दिखाते हैं. कॉर्पोरेट मुनाफे और GDP के अनुपात तथा ROE में भी सुधार का अनुमान है, जो इक्विटी मल्टीपल में बढ़ोतरी के पक्ष को मजबूत करता है.
किन सेक्टर्स पर दांव लगाने की सलाह?
मॉर्गन स्टेनली की इस रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सेंसेक्स को 1,00,000 के जादुई आंकड़े की तरफ बढ़ना है, तो भारी वेटेज वाले सेक्टर्स को आगे आकर कमान संभालनी होगी. रिधम देसाई के अनुसार, निवेशकों को इस बुल रन का फायदा उठाने के लिए निम्नलिखित सेक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए:
- फाइनेंशियल और लार्ज कैप बैंक: सेंसेक्स को ऊपर ले जाने में बैंकिंग सेक्टर का सबसे बड़ा हाथ होता है.
- डोमेस्टिक कंजम्पशन: भारत के मध्यम वर्ग और ग्रामीण इलाकों में बढ़ती मांग से जुड़ी कंपनियां.
- इंडस्ट्रियल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार के कैपेक्स और मेक इन इंडिया पहल से लाभान्वित होने वाले शेयर्स.
भारत की डीरेटिंग साइकलिक है
इमर्जिंग मार्केट्स की तुलना में भारतीय इक्विटी के हालिया कमजोर प्रदर्शन के बावजूद, मॉर्गन स्टेनली भारत के वैल्यूएशन में आई डीरेटिंग को लॉन्गटर्म के बजाय साइकलिक मानता है. रिपोर्ट का तर्क है कि घटती प्रजनन दर और भारत के सर्विस बेस्ड एक्सपोर्ट मॉडल पर AI के प्रभाव को लेकर चिंताएं “बढ़ाचढ़ाकर बताई गई हैं”, और इसके बजाय AI को कम बेस से लेबर प्रोडक्टीविटी बढ़ाने के एक मध्यमअवधि के अवसर के रूप में देखती है.
भारत का मार्केटकैपसेGDP रेश्यो और ओवरऑल वैल्यूएशन इंडिकेटर ऊपर जाने की गुंजाइश का संकेत देते हैं, और मॉर्गन स्टेनली के मॉडल मौजूदा प्राइसटूबुक लेवल्स पर लगभग 11.6 फीसदी के 10साल के सालाना रिटर्न का संकेत देते हैं. रणनीतिकारों ने लिखा है कि हमारा तर्क है कि भारत की सापेक्ष डीरेटिंग साइकलिक है और ग्रोथ में तेजी आने के साथ, इसमें पलटने की क्षमता है. उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक मुनाफ़े में भारत की हिस्सेदारी अब 2009 के बाद से रिकॉर्ड स्तर पर वैश्विक सूचकांक में इसके वेटेज से कहीं ज़्यादा है.


