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तुलसी की पत्तियां सिर्फ पूजा के लिए नहीं, ब्लड शुगर कंट्रोल में भी हो सकती हैं फायदेमंद,,

तुलसी की पत्तियां सिर्फ पूजा के लिए नहीं, ब्लड शुगर कंट्रोल में भी हो सकती हैं फायदेमंद,,

घर के आंगन में पूजी जाने वाली ‘तुलसी’ न केवल धार्मिक रूप से पूजनीय है, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधियों की रानी (Queen of Herbs) भी कहा गया है। बदलते मौसम में सर्दी-खांसी से राहत दिलाने वाली तुलसी को लेकर अब आधुनिक मेडिकल साइंस भी कई बड़े दावे कर रहा है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि तुलसी की पत्तियां इतनी ज्यादा असरदार हैं कि ये डायबिटीज को भी कंट्रोल कर सकती हैं।  Journal of Ethnopharmacology और Phytomedicine में प्रकाशित क्लिनिकल रिसर्च के मुताबिक जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन को पहचानना बंद कर देती हैं, तो टाइप-2 डायबिटीज होती है। रिसर्च के अनुसार, तुलसी के पत्तों का अर्क पैंक्रियाज की बीटा-कोशिकाओं (Beta Cells) को सीधे उत्तेजित करता है। यह इंसुलिन के स्राव को बढ़ाता है और कोशिकाओं में इंसुलिन रिसेप्टर्स की संवेदनशीलता को सक्रिय करता है, जिससे खून में तैर रहा ग्लूकोज आसानी से एनर्जी में बदल जाता है।

आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक डायबिटीज मरीज अगर ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं तो तुलसी के पत्तों का सेवन करें। तुलसी में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी फंगल, एंटी फ्लू, एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं जो बॉडी का बीमारियों से बचाव करते हैं और बॉडी को हेल्दी रखते हैं। आइए रिसर्च से भी जान लेते हैं कि तुलसी की पत्तियां कैसे डायबिटीज कंट्रोल करती हैं।

फास्टिंग और पोस्ट-प्रांडियल शुगर कम करती हैं तुलसी की पत्तियां

Indian Journal of Clinical Biochemistry में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों पर किया गया रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल में मरीजों को एक निश्चित समय तक रोज सुबह खाली पेट तुलसी के पत्तों का पाउडर दिया गया। जिन लोगों ने रोज तुलसी के पाउडर का सेवन किया उनकी फास्टिंग ब्लड शुगर (खाली पेट) में 17.6% और पोस्ट-प्रांडियल शुगर यानी भोजन के बाद की शुगर में 7.3% तक की कमी दर्ज की गई। तुलसी भोजन के बाद कार्बोहाइड्रेट के टूटने की रफ्तार को धीमा करती है, जिससे अचानक शुगर स्पाइक नहीं होता।

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है तुलसी

Journal of Clinical and Biochemical Nutrition के मुताबिक हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ते हैं, जो आंखों (Retinopathy) और किडनी (Nephropathy) को डैमेज करते हैं। रिसर्च साबित करती है कि तुलसी में प्रचुर मात्रा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स इन फ्री रेडिकल्स को नष्ट करते हैं। इससे भविष्य में डायबिटीज के कारण होने वाली किडनी, आंखों, नसों और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।

इम्यूनिटी मजबूत बनाती हैं ये पत्तियां

तुलसी में विटामिन C, यूजेनॉल (Eugenol) और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। यही वजह है कि सर्दी-जुकाम और मौसमी संक्रमण के दौरान भी इसका उपयोग किया जाता है।

तनाव कम करने में सहायक

तुलसी को एक एडाप्टोजेन (Adaptogen) माना जाता है। इसका मतलब है कि यह शरीर को मानसिक और शारीरिक तनाव से बेहतर तरीके से निपटने में मदद कर सकती हैं। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि तुलसी तनाव हार्मोन कोर्टिसोल (Cortisol) के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकती है। Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine की न्यूरोलॉजिकल रिपोर्ट के मुताबिक मानसिक तनाव होने पर एड्रीनलीन ग्रंथियां ‘कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज करती हैं, जो लिवर से अतिरिक्त ग्लूकोज निकालकर शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देता है। तुलसी को विज्ञान में एक बेहतरीन ‘एडाप्टोजेन माना गया है। क्लिनिकल स्टडी के अनुसार, तुलसी का सेवन मस्तिष्क को शांत कर कोर्टिसोल के स्तर को 30% तक कम कर देता है, जिससे तनाव के कारण बढ़ने वाली शुगर खुद कंट्रोल हो जाती है।

पाचन तंत्र को बेहतर बना सकती है

तुलसी पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ाने, गैस, पेट फूलने और अपच जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक मानी जाती है। इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण आंतों के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं। International Journal of Food Sciences and Nutrition के मुताबिक तुलसी पेट के गैस्ट्रिक जूस और पाचक एंजाइम्स के स्राव को संतुलित करती है। यह लिवर और आंतों के मेटाबॉलिज्म (चयापचय) में सुधार करती है, जिससे भोजन का अवशोषण सही तरीके से होता है। पाचन तंत्र दुरुस्त रखने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर और वजन दोनों ही कंट्रोल में रहते हैं।

दिल की सेहत को मिल सकता है फायदा

तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकती है, जिससे हृदय स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि इस पर और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है।

तुलसी का सेवन करते समय रखें इन बातों का ध्यान

हालांकि तुलसी को सामान्य रूप से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यदि आप डायबिटीज की दवाएं, खून पतला करने वाली दवाएं (Blood Thinners) या अन्य गंभीर बीमारियों की दवा ले रहे हैं, तो नियमित रूप से तुलसी का अधिक मात्रा में सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी हर्बल उपाय का नियमित सेवन नहीं करना चाहिए। डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें और तुलसी को केवल सहायक उपाय के रूप में ही अपनाएं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। तुलसी कई औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है, लेकिन यह किसी भी बीमारी का इलाज या डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का विकल्प नहीं है। यदि आपको डायबिटीज या कोई अन्य गंभीर बीमारी है, या आप नियमित रूप से दवाएं ले रहे हैं, तो तुलसी का नियमित या अधिक मात्रा में सेवन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। किसी भी उपचार या दवा में बदलाव बिना चिकित्सीय सलाह के न करें।

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