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इंडोनेशिया: जिस प्रम्बानन मंदिर की दीवारों पर रामायण की कहानी, वो कितना खास? जहां जाएंगे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा के पहले पड़ाव यानी इंडोनेशिया पहुंच गए हैं. वे यहां से आठ जुलाई को आस्ट्रेलिया के लिए रवाना होंगे. अपनी इंडोनेशिया विजिट में वे अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे. पीएम मोदी सुप्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर भी जाएंगे. इंडाेनेशिया वो देश है जहां दुनिया की सबसे मुस्लिम आबादी है. आइए, जानते हैं कि सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में कितने मंदिर हैं? कौनकौन से प्रमुख मंदिर हैं? प्रम्बानन मंदिर का इतिहास क्या है, जहां पीएम मोदी जाएंगे?

इंडोनेशिया: जिस प्रम्बानन मंदिर की दीवारों पर रामायण की कहानी, वो कितना खास? जहां जाएंगे PM मोदी

इंडोनेशिया दुनिया का सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है. यहां लगभग 87 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म को मानते हैं. इसके बावजूद यह देश अपनी प्राचीन हिंदू और बौद्ध विरासत के लिए भी जाना जाता है. इंडोनेशिया में आज भी कई ऐतिहासिक हिंदू मंदिर मौजूद हैं. इनमें सबसे प्रसिद्ध है प्रम्बानन मंदिर. यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यहां जाने की चर्चा के कारण भी यह मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है.

इंडोनेशिया में कुल कितने मंदिर हैं?

इंडोनेशिया में हजारों हिंदू मंदिर हैं. स्थानीय भाषा में इन्हें पुरा या चांडी कहा जाता है. सबसे अधिक मंदिर बाली द्वीप पर हैं. बाली में हिंदू आबादी बहुसंख्यक है. यहां लगभग 20 हजार से अधिक मंदिर होने का अनुमान है. छोटेबड़े गांवों से लेकर पहाड़ों और समुद्र तटों तक पर मंदिर दिखाई देते हैं. जावा, लोम्बोक और अन्य द्वीपों पर भी कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं. इनमें कुछ मंदिर हजार साल से भी अधिक पुराने बताए जाते हैं.

प्रम्बानन मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में संजय वंश के राजा रकाई पिकातन ने कराया था. फोटो: pexels

प्रम्बानन मंदिर कहां है?

प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित है. यह योग्यकार्ता शहर के पास बना हुआ है. राजधानी जकार्ता से इसकी दूरी लगभग पांच सौ किलोमीटर है. यह मंदिर 9वीं शताब्दी का है. इसे दक्षिणपूर्व एशिया के सबसे भव्य हिंदू मंदिरों में गिना जाता है.

किसने बनवाया प्रम्बानन मंदिर?

इतिहासकारों के अनुसार प्रम्बानन मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में संजय वंश के राजा रकाई पिकातन ने कराया था. बाद में अन्य शासकों ने भी इसका विस्तार किया. उस समय जावा में हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराएं मौजूद थीं. इसी दौर में पास में बौद्ध स्मारक बोरोबुदुर भी बना. प्रम्बानन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. बाद में यहां भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के भी मंदिर बनाए गए. कई शताब्दियों तक यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा.

प्रम्बानन मंदिर अपनी ऊंची और आकर्षक शिखर शैली के लिए प्रसिद्ध है. फोटो: Pexels

क्यों उजड़ गया था प्रम्बानन मंदिर?

समय के साथ जावा में राजनीतिक बदलाव हुए. राजधानी दूसरे क्षेत्र में चली गई. इसके बाद मंदिर का महत्व धीरेधीरे कम होता गया. भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों से भी मंदिर को नुकसान पहुंचा. कई हिस्से टूट गए. लंबे समय तक यह परिसर खंडहर के रूप में पड़ा रहा. 19वीं शताब्दी में यूरोपीय खोजकर्ताओं का ध्यान इस मंदिर की ओर गया. इसके बाद संरक्षण और पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ. आज इसका बड़ा हिस्सा फिर से खड़ा किया जा चुका है.

मंदिर की वास्तुकला क्यों है खास?

प्रम्बानन मंदिर अपनी ऊंची और आकर्षक शिखर शैली के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर परिसर में कुल 240 संरचनाएं थीं. इनमें मुख्य और छोटे मंदिर शामिल थे.मुख्य परिसर में तीन बड़े मंदिर हैं.भगवान शिव का मंदिर,भगवान विष्णु का मंदिर औरभगवान ब्रह्मा का मंदिर.इनके सामने नंदी, गरुड़ और हंस को समर्पित मंदिर भी बने हैं. भगवान शिव का मंदिर सबसे ऊंचा है. इसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है. मंदिर की दीवारों पर बेहद सुंदर नक्काशी की गई है. इनमें हिंदू धर्म की अनेक कथाएं उकेरी गई हैं.

रामायण की कहानी भी है मंदिर की दीवारों पर

प्रम्बानन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी पत्थर की नक्काशी शामिल है. मंदिर की दीवारों पर रामायण की कथा को विस्तार से दर्शाया गया है. भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण से जुड़े कई दृश्य पत्थरों पर उकेरे गए हैं. इन नक्काशियों को देखने हर साल दुनिया भर से पर्यटक पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में रामायण बैले नाम का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है. इसमें नृत्य और संगीत के माध्यम से रामायण की कहानी प्रस्तुत की जाती है.

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल

साल 1991 में यूनेस्को ने प्रम्बानन मंदिर को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया. इसके बाद संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा मिला. आज यह इंडोनेशिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है. हर साल लाखों लोग इस मंदिर को देखने आते हैं.

इंडोनेशिया पहुंचे पीएम मोदी के सामने स्थानीय कलाकारों ने दी परफॉर्मेंस. फोटो: X/@narendramodi

भारत और इंडोनेशिया का सांस्कृतिक रिश्ता

भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल आधुनिक दौर तक सीमित नहीं हैं. प्राचीन समय में व्यापार, समुद्री संपर्क और सांस्कृतिक आदानप्रदान के माध्यम से भारतीय संस्कृति इंडोनेशिया पहुंची. इसी प्रभाव के कारण वहां हिंदू धर्म, संस्कृत भाषा और रामायणमहाभारत जैसी परंपराओं का प्रसार हुआ. आज भी इंडोनेशिया में रामायण और महाभारत पर आधारित नृत्य, नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. कई स्थानों के नाम और सांस्कृतिक प्रतीकों में भी भारतीय प्रभाव देखा जा सकता है.

Witnessed a captivating performance of Wayang Kulit, Indonesias treasured shadow puppetry tradition, bringing the timeless story of the Ramayan to life. It was a moving reminder of how our shared civilisational heritage has travelled across seas and generations, taking on pic.twitter.com/wmEW3QTcUT

— Narendra Modi July 6, 2026

इंडोनेशिया भले ही दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश हो, लेकिन उसकी पहचान केवल इसी तक सीमित नहीं है. यह देश विविध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी धनी है. बाली के हजारों मंदिर हों या जावा का भव्य प्रम्बानन मंदिर, ये सभी इंडोनेशिया के बहुआयामी इतिहास की कहानी कहते हैं. प्रम्बानन मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, भगवान शिव को समर्पित विशाल मंदिर, रामायण की अद्भुत नक्काशी और यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा इस ऐतिहासिक धरोहर को नई चर्चा में ला सकता है और भारतइंडोनेशिया के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर रेखांकित कर सकता है.

इंडोनेशिया के प्रमुख हिंदू मंदिर

  • मध्य जावा द्वीप के प्रमुख मंदिर: प्रम्बानन मंदिर, चांडी सुकुह, चांडी चेतो
  • बाली के प्रमुख मंदिर: बेसाकीह मंदिर, तनाह लोट मंदिर, उलुवातु मंदिर, तिर्ता एम्पुल मंदिर, गोवा लवाह मंदिर, तमन आयुन मंदिर, पुरा उलुन दानु ब्रातन मंदिर

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