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भूटानी ग्रुप के हाथों में नोएडा का GIP Mall! ₹10,000 करोड़ से पूरी तरह बदल जाएगा लुक

दिल्लीएनसीआर के रियल एस्टेट और मनोरंजन जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आई है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने भूटानी ग्रुप के उस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है, जिसके तहत कंपनी नोएडा के प्रसिद्ध ‘एंटरटेनमेंट सिटी’ का पूरी तरह से कायाकल्प करने जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को दोबारा जिंदा करने और इसे एक वैश्विक पहचान देने के लिए भूटानी ग्रुप कुल 10,000 करोड़ रुपए का भारीभरकम निवेश करने के लिए तैयार है.

भूटानी ग्रुप के हाथों में नोएडा का GIP Mall! ₹10,000 करोड़ से पूरी तरह बदल जाएगा लुक

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 59,30,304 इक्विटी शेयरों के ट्रांसफर के रजिस्ट्रेशन का निर्देश दिया है. ये शेयर ‘एंटरटेनमेंट सिटी लिमिटेड’ की जारी शेयर कैपिटल का सिर्फ 4.26 फीसदी हैं और इन्हें कथित तौर पर IIRF होल्डिंग्स V लिमिटेड और विस्ट्रा ITCL लिमिटेड ने ‘परमेश कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड’ के नाम ट्रांसफर किया था. भूटानी इंफ्रा ग्रुप, PCCL का ही हिस्सा है. एंटरटेनमेंट सिटी नोएडा में ‘द ग्रेट इंडिया प्लेस’, ‘गार्डन्स गैलेरिया मॉल’, ‘वर्ल्ड्स ऑफ वंडर’ एम्यूजमेंट पार्क और ‘किडजानिया’ चलाती है.

लंबे समय से चल रहा था मामला

147 एकड़ के आंशिक रूप से विकसित प्रोजेक्ट का हिस्सा होने के नाते, भूटानी ग्रुप NCR के बीचोंबीच एंटरटेनमेंटबेस्ड मिक्स्डयूज डेस्टिनेशन विकसित करने के लिए और 10,000 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बना रहा है. एंटरटेनमेंट सिटी को ‘अप्पू घर ग्रुप’ और ‘यूनिटेक ग्रुप’ प्रमोट करते हैं. इस प्रोजेक्ट में खाली जमीन के टुकड़े भी हैं जिन्हें नया मालिक विकसित कर सकता है. भूटानी इंफ्रा के CEO आशीष भूतानी ने कहा कि NCLT के हालिया आदेश ने एक ऐसे मामले में बड़ी कानूनी स्पष्टता ला दी है जो लंबे समय से अनसुलझा था…

हमारा पक्का मानना ​​है कि अगर सभी स्टेकहोल्डर्स, खासकर यूनिटेक, एक साझा विजन के साथ मिलकर काम करें, तो इस प्रोजेक्ट को भारत के प्रमुख एंटरटेनमेंट, टूरिज्म और लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन में से एक के तौर पर फिर से स्थापित किया जा सकता है. इसके साथ ही, भूटानी ग्रुप नोएडा में तीन बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करेगा, जिनमें हाल ही में खुले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक ‘फिल्म सिटी’ और एक ‘स्पोर्ट्स सिटी’ प्रोजेक्ट शामिल है. PCCL, एंटरटेनमेंट सिटी लिमिटेड में 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की सार्वजनिक प्रक्रिया में सफल बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आई थी.

ECL के वीकल का बयान

यूनिटेक होल्डिंग्स लिमिटेड और एंटरटेनमेंट सिटी लिमिटेड के वकील सिद्धार्थ बत्रा ने साफ किया है कि NCLT का यह आदेश सिर्फ ECL की 4.26 फीसदी हिस्सेदारी से जुड़ा है. इसलिए, इस आदेश के तहत ECL का मालिकाना हक या कंट्रोल ट्रांसफर नहीं हुआ है. बत्रा ने कहा कि 30 जून 2026 का NCLT का आदेश ECL में PCCL के पक्ष में सिर्फ 4.26 फीसदी हिस्सेदारी के ट्रांसफर के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा है. यह आदेश अपने आप में किसी भी तरह से ECL के टेकओवर, मैनेजमेंट के ट्रांसफर, ज्यादातर हिस्सेदारी के ट्रांसफर या कंट्रोल हासिल करने को मंज़ूरी नहीं देता है. इस आदेश को अपीलेट फोरम में चुनौती देने का प्रस्ताव है.

किस तरह से फंसा था मामला

इस ट्रांजैक्शन के तहत, PCCL ने शेयर खरीद समझौतों के जरिए 4.26 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की — जिसमें IIRF होल्डिंग्स से 3.70 फीसदी और विस्ट्रा ITCL से 0.56 फीसदी हिस्सेदारी शामिल थी — और बाद में इन शेयरों को उसके डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया. ECL और यूनिटेक ने PCCL को शेयरहोल्डर के तौर पर रजिस्टर करने से इनकार कर दिया. उनका तर्क था कि यह ट्रांसफर ‘राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल’ , ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ और ‘शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट’ का उल्लंघन था. PCCL का तर्क था कि वह शेयरों का बेनिफिशियल ओनर बन गया है, यह ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट से मंजूर विनिवेश प्रक्रिया का हिस्सा था, और शामिल पक्षों के व्यवहार से राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल को छोड़ दिया गया था.

NCLT के सामने आया पूरा मामला

यूनिटेक ने तर्क दिया कि PCCL बोली की शर्तों का पालन करने में नाकाम रहा, तय ट्रांजैक्शन स्ट्रक्चर में बदलाव किया, और ECL की सिर्फ 100 फीसदी बिक्री ही मंजूर थी — न कि आंशिक ट्रांसफर. NCLT के सामने मुख्य मुद्दा यह था कि क्या कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 58 और 59 के तहत रेक्टिफिकेशन करके ECL के मेंबर्स के रजिस्टर में PCCL का नाम दर्ज किया जाना चाहिए. शेयरहोल्डिंग के पैटर्न से पता चलता है कि ECL की इक्विटी शेयर कैपिटल का लगभग 53.15 फीसदी हिस्सा इंटरनेशनल अम्यूजमेंट लिमिटेड के पास है, जबकि लगभग 41.95 फीसदी हिस्सा यूनीटेक होल्डिंग्स लिमिटेड के पास है, जो यूनीटेक लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी है. यह बताना जरूरी है कि इंटरनेशनल अम्यूजमेंट लिमिटेड की 53.15 फीसदी बिना बिकी इन्वेंट्री एसेट्स को ईडी ने अटैच कर लिया है और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इसकी पुष्टि की है.

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